Consumer Court Orders New Car: देश भर में E20 फ्यूल को लेकर चल रही चर्चाओं तेज है. इसी बीच एक मामले में पहली बार कोर्ट ने आदेश जारी किया है. छत्तीसगढ़ के रायपुर में कंज्यूमर कोर्ट ने गाड़ी के मालिक के पक्ष में अपना फैसला सुनाये हुए कंपनी को नई गाड़ी देने का आदेश दिया है. इसके साथ ही भारी जुर्माना भी लगाया है.
E20 पेट्रोल से गाड़ी खराब होने का दावा
यह मामला राजधानी रायपुर निवासी डॉक्टर प्रेमराज देब्ता का है. उन्होंने जून 2024 में मारुति कंपनी की ग्रैंड विटारा आईईई स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड जेटा प्लस एसयूवी ख़रीदी थी. हालांकि, यह वाहन जनवरी 2023 में निर्मित हुआ था.
कार के मालिक ने दावा किया था कि E20 पेट्रोल भरवाने के बाद से उसकी कार के इंजन में गड़बड़ियां आने लगीं. इंजन की परफॉर्मेंस खराब हो गई, मिसफायरिंग और माइलेज में भी गिरावट देखी गई. बार-बार सर्विस सेंटर पर ले जाकर कार रिपेयर कराने के बावजूद ये दिक्कतें बनी रहीं, जिससे उपभोक्ता का काफी खर्चा हुआ. इसके बाद बाद उन्होंने रायपुर के ज़िला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी.
कंपनी को नई गाड़ी देने का आदेश
इस मामले में कंज्यूमर कोर्ट ने अपने पहले और सबसे महत्वपूर्ण आदेश में कहा कि कंपनी शिकायतकर्ता का मौजूदा वाहन वापस लेगी और उसकी जगह उसी मॉडल का नया E20 ईंधन सपोर्टेड वाहन उपलब्ध कराएगी. यह प्रक्रिया आदेश की तारीख से 45 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी. यानी उपभोक्ता को अब ऐसा वाहन मिलेगा जो वास्तव में E20 पेट्रोल पर चलने के लिए सक्षम होगा.
गाड़ी नहीं दी तो लौटाने होंगे पैसे
आयोग ने अपने आदेश में एक वैकल्पिक व्यवस्था भी तय की. यदि कंपनी 45 दिनों के भीतर नया E20 सपोर्टेड वाहन उपलब्ध नहीं कराती है, तो उसे वाहन की पूरी कीमत वापस करनी होगी. आयोग ने स्पष्ट किया कि कंपनी को वाहन का मूल्य 18 लाख 29 हजार रुपये, आरटीओ शुल्क 1 लाख 86 हजार 850 रुपये तथा बीमा प्रीमियम 34 हजार 644 रुपये मिलाकर कुल 20 लाख 50 हजार 494 रुपये शिकायतकर्ता को लौटाने होंगे.
देश का पहला मामला
रायपुर जिला उपभोक्ता आयोग का यह फैसला E20 पेट्रोल से जुड़े मामलों में देश के सबसे पहले आदेशों में से एक माना जा रहा है. आयोग ने न केवल सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार को स्वीकार किया, बल्कि कंपनी को नया E20 सपोर्टेड वाहन देने का आदेश दिया. ऐसा न करने पर 20.50 लाख रुपये लौटाने, एक लाख रुपये की मानसिक क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है. इसके अलावा 10 हजार रुपये वाद व्यय और आदेश का पालन न करने पर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का निर्देश भी दिया. यह फैसला स्पष्ट करता है कि उपभोक्ता को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि वही उत्पाद मिलना चाहिए जिसका वादा किया गया था.
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