बिलाईगढ़। जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमले में छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के छुईहा गांव निवासी भूपेंद्र भैना (28 वर्ष) की मौत से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। रक्षाबंधन से कुछ दिन पहले हुई इस घटना ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। सबसे मार्मिक दृश्य तब सामने आया, जब मृतक की बहन ने जिला प्रशासन से अपने भाई के अंतिम दर्शन कराने की गुहार लगाई।
शनिवार को कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू, एसपी सुनील शर्मा समेत प्रशासनिक अधिकारी और विभिन्न राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधि मृतक के घर पहुंचे। उन्होंने शोकाकुल परिवार से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की और हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया।
बहन बोली- भैया ने कहा था, रक्षाबंधन पर जरूर आऊंगा
मृतक की बहन अन्नू ने भावुक होकर बताया कि करीब एक माह पहले उसकी भाई से फोन पर बात हुई थी। उस दौरान भूपेंद्र ने वादा किया था कि वह रक्षाबंधन पर घर आएगा। लेकिन अब उसके आने की जगह उसकी शहादत की खबर आई है। रोते हुए अन्नू ने प्रशासन से सिर्फ एक ही मांग रखी कि उसके भाई का पार्थिव शरीर गांव लाया जाए, ताकि परिवार अंतिम दर्शन कर सके।
कलेक्टर ने दिया हरसंभव मदद का भरोसा
परिवार की पीड़ा सुनकर कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू ने मृतक की बहन को गले लगाकर सांत्वना दी। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन राज्य और केंद्र सरकार के संबंधित अधिकारियों से लगातार संपर्क में है और पूरा प्रयास किया जा रहा है कि भूपेंद्र भैना का पार्थिव शरीर उनके गृहग्राम लाया जा सके, जिससे परिवार और ग्रामीण अंतिम विदाई दे सकें।
मासूम बेटे को नहीं पता, पिता अब कभी नहीं लौटेंगे
भूपेंद्र अपने पीछे एक छोटे बेटे मानस को छोड़ गए हैं। परिवार के अनुसार मासूम बेटे को अभी तक यह एहसास नहीं है कि उसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ चुका है। परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।
जनप्रतिनिधियों ने जताई संवेदना
शोक व्यक्त करने वालों में भाजपा जिला अध्यक्ष ज्योति पटेल, पूर्व जिला अध्यक्ष सुभाष जलान, डॉ. दिनेश जांगड़े, महामंत्री द्वारिका साहू, कांग्रेस जिला अध्यक्ष ताराचंद देवांगन सहित अन्य जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने परिवार को हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।
प्रशासन पर टिकी लोगों की निगाहें
अब पूरे जिले की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन की पहल के बाद भूपेंद्र भैना का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव लाया जा सकेगा या नहीं, ताकि परिवार रक्षाबंधन से पहले अपने बेटे और भाई को अंतिम विदाई दे सके।
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