बात इस साल के बीते फरवरी के एक गजब रात की है। मनोज बाजपेई जो खुद ब्राह्मण है और एक निर्देशक नीरज पांडे भी ब्राह्मण है,दोनों की जोड़ी। ने एक थ्रिलर मूवी बनाई।नाम था ” घूसखोर पंडत” बड़ा बवाल मचा।बवाल इस बात का नहीं था कि घूसखोर कौन कौन है बल्कि पंडत के साथ घूसखोर शब्द जुड़ने से हुआ था। घूसखोरी की दुनियां धर्म, जाति, लिंग से परे है, निरपेक्ष है। इसके समर्थकों के अपनी अपनी रायशुमारी है।खैर, पंडितों सहित राजनैतिक दलों के विरोध के चलते “घूसखोर पंडत” नाम की भ्रूण हत्या हो गई।
अक्टूबर के महीने के आखिरी सप्ताह में “गजब रात” नाम के बदले टाइटल के साथ ओटीटी प्लेटफॉर्म पर यही थ्रिलर मूवी क्या आई,रंग जमा ले गई।आमतौर पर सरकारी कर्मचारियों के लिए ये जुमला बना हुआ है कि उनके महकमे में कोई भी सरकारी काम बिना पैसे के नहीं होता।या ये कह ले कि हर सरकारी काम के पीछे मंशा”मुद्रा” ही होती है।
कुछ खास विभाग घूसखोरी के लिए दूसरे विभाग की तुलना में ज्यादा कुख्यात है।इसी विभाग के एक तृतीय श्रेणी के एक निरीक्षक की तथा कथा है “गजब रात” थोड़ा सा फ्लैश बैक में चलते है। लापता लेडीज फिल्म में सब इंस्पेक्टर श्याम मनोहर(रवि किशन) ऐसे पुलिस अधिकारी होते है जो बिना घूस लिये काम ही नहीं करते। यहां तक इकलौते ईमानदारी के मामले में नेग के रूप में मंगल सूत्र ले ही लेते है। सब इंस्पेक्टर श्याम मनोहर के परम्परागत रूप में मनोज बाजपेई , सब इंस्पेक्टर अजय निर्विद की भूमिका में है।
लापता लेडीज के रवि किशन और गजब रात के मनोज बाजपेई के किरदारों में सामान्य बात ये है कि दोनों महा भ्रष्ट पुलिस अधिकारी की भूमिका में है। दोनों का फिल्म में परिस्थितिजन्य रूप से परेशान रहने की स्थिति फंसी महिलाओं फायदा उठाना होता है। दोनों महिला के सकारात्मक उद्देश्य को देख बेईमान अधिकारी क्षणिक मन बदलता है और अपने भ्रष्ट्र चरित्र से एक बार के लिए ईमानदार बनते है। इसके बाद जैसे रहते है वैसी हो जाते है।
मनोज बाजपेई, सही रूप में सार्थक सिनेमा के पैरवीकार है। गंभीर अभिनय करना मनोज का स्वभाव है। फिल्म दर फिल्म उनके अभिनय में अनुभव का तजुर्बा दिखता ही है साथ ही साथ नयापन का आभास भी होता है। ऐसा ही कुछ गजब रात के गजब मनोज बाजपेई ने भी किया है। समूचे भ्रष्ट सिस्टम से लड़ना असंभव सा दिखता है लेकिन ईमानदार बन जाने पर संतुलन बनता है, ये गजब रात का सार है.
नीरज पांडे, थ्रिलर फिल्मों में थ्रिल की स्पीड के लिए जो गेयर बदलते है वो नशे से कम नहीं होता है। गजब रात में मनोज बाजपेई के सहअभिनायकर्ताओ को अभिनय के लिए उतना लेंथ ही नहीं मिला कि वे अपने को स्थापित कर पाते हां जितनी भी जगह मिली उनमें आर्या साहनी की भूमिका में अदिति संध्या शर्मा ने बेबाक अभिनय किया है। नामित खन्ना औरअक्षय ओबेरॉय ने एनआईए और सीबीआई के भ्रष्ट अधिकारियों की भूमिका निभाकर तीसरे चौथे क्रम में रहे।
दिव्या दत्ता लेखन के चलते अभिनय से दूर होते दिखी।उनसे बेहतर समाजसेविका की भूमिका में श्रद्धा दास ने अपनी भूमिका के साथ ज्यादा न्याय किया। दो घंटे की मूवी में आपको पता नहीं चलेगा कि रफ्तार पकड़ती मूवी कब थ्रिल को एक्सट्रीम पर ले गई। मनोज बाजपेई , अपनी सशक्त भूमिका के चलते ,कामन पीपुल के स्पेशल एक्टर माने जा सकते है ,गजब मनोज
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