1947 में देश को अपनी जिद पर दो भाग में बंटवाने वालो ने हिन्दू मुस्लिम भाई चारा को दिखावे के लिए दिखाते हुए कहा था।दोनों देश की सीमा का बंटवारा हुआ है दिल का नहीं, रिश्ते का नहीं। हिंदुस्तान ने दिल बड़ा रखा लेकिन पाकिस्तान दगाबाज़ निकला। विभाजन के समय पाकिस्तान में चौदह फीसदी हिंदू थे।भारत में दस फीसदी मुस्लिम थे।
आज की स्थिति में पाकिस्तान में बमुश्किल दो फीसदी मुस्लिम है और भारत में आज भी चौदह फीसदी आबादी है। याने पाकिस्तान से हिंदू भारत आ गाए या उनका पाकिस्तान में जबरिया धर्मांतरण हो गया।
भारत में दस फीसदी आबादी बढ़कर चौदह फीसदी हो गई।इसी आबादी में एक व्यक्ति जो अमेरिकी नागरिक है और ओवरसीज नागरिकता के बल पर भारत के बॉलीवुड में हीरो बनकर कमाई कर रहा है। नाम है इमरान खान। इनको 2008 से 2015 तक हिंदी फिल्मों में काम मिला।पिछले ग्यारह साल से फिल्मे नहीं मिल रही है(इसे मोदी सरकार के आगमन के साथ संयोग के रूप में न देखे)।

अचानक ही अपना आपा खो बैठे और चुनाव आयोग के विरोध में मुंबई में प्रदर्शन करने चले गए। हिरासत में लिए गए।फरमान जारी हुआ कि दोहरी नागरिकता के नाम पर आपको प्रदर्शन की इजाजत नहीं है, अमेरिका वापस जाइए।
इमरान खान आपको मुंबई हाई कोर्ट ने बताया कि अगर जो उत्पात आपने भारत में किया अगर अमेरिका में करते तो उसी दिन जिस देश से आए हो उसी देश में उतार दिए जाते।
इमरान खान, आप पाकिस्तान के इमरान खान नहीं है और न ही भारत में पाकिस्तान जैसा सैनिक शासन है, करके बच गए। ये भी अच्छा हुआ कि आपने अपनी हद भी जान ली। आपको बताना पड़ गया कि आपके रिश्ते नाते वाले भारत में है।अपने ये भी बताया कि आपकी 10 साल की बेटी यही रहती है। आपने रिश्तेदारों को जो फिल्म निर्माण उद्योग से जुड़े हुए है उनका भी हवाला देना पड़ा।
आपको ये भी झूठ बोलना पड़ा कि आप प्रदर्शन में शामिल नहीं थे।संयोग से पहुंच गए थे। दरअसल आप उस दिन महाराष्ट्र पुलिस से बहस कर रहे थे। अच्छा हुआ जो हाई कोर्ट में जा कर तौबा कर ली। खतरा टला नहीं है आपको अगली सुनवाई तक राहत मिली है।
कला से जुड़े लोगों को अपनी कला पर फोकस रखना चाहिए।उनको चाहने वाले बहुत से लोग है लेकिन उन्हें अपना शहरी नक्सली होना अच्छा लगता है। देश में हिंदुत्व का अंडर करेंट है इस कारण प्रदर्शन करने वालो को जमावड़ा की जगह उस भीड़ के बारे में सोचना चाहिए तो दूर बैठे तमाशा देख रहे हैं
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