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Kishtwar Cloudburst: 60 मौतें, 100 घायल, 200 लापता… लंगर की लाइन में खड़े थे लोग, किश्तवाड़ में बादल फटा और अचानक सैलाब में समा गए लोग

हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बाद अब जम्मू-कश्मीर में बादल फटने से बड़ी तबाही हुई है. जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ के चशोती इलाके में गुरुवार को बादल फटने से आई बाढ़ में 60 लोगों को मौत हो गई. इसमें CISF के दो जवान भी शामिल हैं. इसके अलावा 200 लोग लापता बताए जा रहे हैं. किश्तवाड़ में बादल फटा और मचैल माता मंदिर के यात्रा मार्ग पर दो मिनट के अंदर पत्थर और मलबा का सैलाब आ गया. जो जहां था वहीं, दब गया या फंस गया. लोगों को सोचने समझने का बिलकुल भी मौका नहीं मिला.

पुलिस-प्रशासन द्वारा लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है. आपदा प्रबंधन टीमों ने मचैल माता मंदिर के पास से कई लोगों को रेस्क्यू किया है. इस हादसे के दौरान मची तबाही में 100 लोग घायल हैं, जिसमें से 37 लोग की हालत गंभीर है. घायलों को किश्तवाड़ के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है. लगभग 70 से 80 लोगों का इलाज पड्डार के उप-जिला अस्पताल में चल रहा है. घटनास्थल से बड़े पत्थरों, उखड़े हुए पेड़ों और बिजली के खंभों को हटाने के लिए खुदाई करने वाली मशीनों की मदद ली जा रही है.

9500 फीट की ऊंचाई पर है मंदिर
बाता दें कि मचैल माता मंदिर जाने वाले रास्ते के चशोती गांव में यह आपदा दोपहर के समय आई. हादसे के समय मचैल माता यात्रा के लिए बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए थे. किश्तवाड़ के एडिशनल एसपी प्रदीप सिंह ने कहा, यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण घटना है. हम सुबह से ही बचाव अभियान चला रहे हैं. अब तक 45 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 100 से ज़्यादा लोग घायल हुए हैं. 200 के करीब अभी भी लापता हैं.

9500 फीट की ऊंचाई पर स्थित मचैल माता मंदिर तक जाने के लिए श्रद्धालु चशोती गांव तक ही मोटर वाहन से पहुंच सकते हैं. उसके बाद उन्हें 8.5 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी होती है. प्रशासन ने लोगों के लिए अलर्ट जारी किया है. सर्च लाइट, रस्सियाँ और खुदाई के औज़ारों के रूप में राहत सामग्री आगे बढ़ाई जा रही है.

कब आई ये आपदा?
गुरुवार की दोपहर 12 बजकर 25 मिनट पर मचैल माता मंदिर जाने वाले मार्ग में पड़ने वाले चशोती गांव में यह आपदा आई. हादसे के समय घटनास्थल पर मचैल माता मंदिर यात्रा के लिए बड़ी संख्या में लोग वहां आए हुए थे. 25 जुलाई को शुरू हुई ये यात्रा 5 सितंबर को समाप्त होनी थी.

किश्तवाड़ शहर से लगभग 90 किलोमीटर दूर चशोती गांव में माता के भक्तों के लिए लंगर लगा था. इस आपदा से लंगर का सामुदायिक रसोईघर सबसे अधिक प्रभावित हुआ. बादल फटने के कारण अचानक बाढ़ आ गई और दुकानों एवं एक सुरक्षा चौकी सहित कई इमारतें बह गईं.

अचानक आई बाढ़ के कारण 16 आवासीय घर और सरकारी इमारतें, तीन मंदिर, चार पवन चक्की, 30 मीटर लंबा एक पुल तथा एक दर्जन से अधिक वाहन क्षतिग्रस्त हो गए.

उमर अब्दुल्ला ने रद्द किए कार्यक्रम
इस त्रासदी के बाद जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 15 को होने वाली एट होम चाय पार्टी रद्द कर दी है. इसके साथ ही उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर होने वाले समारोह के सास्कृतिक कार्यक्रमों को भी रद्द कर दिया है. राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल, पुलिस, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल, सेना और स्थानीय वॉलनटिअसर्स राहत बचाव कार्य में लगे हुए है. सर्च लाइट, रस्सियाँ और खुदाई के औज़ारों के रूप में राहत सामग्री आगे बढ़ाई जा रही है.

गृह मंत्री ने उपराज्यपाल व मुख्यमंत्री से की बात
किश्तवाड़ में बादल फटने की घटना के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घटना पर शोक जताया. उन्होंने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री से बात की और हर संभव मदद का आश्वसन दिया. प्रशासन राहत एवं बचाव कार्य चला रहा है तथा राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की टीमें घटनास्थल पर पहुंच गई हैं. शाह ने ‘एक्स’ पर कहा कि किश्तवाड़ ज़िले में बादल फटने की घटना पर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री से बात की. स्थानीय प्रशासन राहत और बचाव कार्य कर रहा है. एनडीआरएफ की टीमें तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गई हैं.

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