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जूते दो पैसे लो, पैसे दो जूते लो

राजश्री प्रोडक्शन वाले पारिवारिक फिल्मे बनाते है।पूरा परिवार बैठकर फिल्म देखता है।हमेशा हैप्पी एंडिंग होती है। “हम आपके है कौन” फिल्म नदिया के पार की शहरी फिल्मीकरण था। इस फिल्म में एक गाना था जूते दो पैसे लो, पैसे दो जूते लो। छत्तीसगढ़ के ऊर्जा विभाग में ये गाना बदले रूप में चल रहा है।सोलर लो, बिजली दो, बिजली दो सोलर लो। सोलर एनर्जी बड़े लोगों के लिए अच्छी योजना है। इसमें मिथुन चक्रवर्ती को भी “कोई शक” नहीं है। जिनके घर में चार पांच एयर कंडीशनर है, बड़े फ्रिज है, चार पांच गीजर है, वाशिंग मशीन है तीस पैंतीस लाइट हो । घर के छत पर पर्याप्त जगह हो अनको सोलर एनर्जी में जरूर जाना चाहिए। ऐसे लोगों को बिजली के बिल से भी कोई फर्क नहीं पड़ता।

सरकार का कहना है कि हाफ बिल करने का कारण प्रधान मंत्री के सोलर योजना को सफल बनाना है। जब बिजली का बिल ज्यादा आएगा तो झक मार कर लोग सोलर एनर्जी को अपनाएंगे। मुख्यमंत्री ने ये बात सार्वजनिक रूप से कही है। अब आम जनता के पक्ष को भी देख ले। छत्तीसगढ़ में लगभग तीन करोड़ दस लाख की आबादी है एक घर में औसत चार सदस्य ले ले तो77 लाख परिवार मान लेते है। प्रदेश में गरीब परिवार की संख्या 72लाख है।। केवल पांच लाख परिवार गरीब नहीं है। ये पांच लाख परिवार सोलर एनर्जी की तरफ प्रेरित हो सकता है मगर 72लाख परिवार को भले ही सबसे कम वाट का सोलर एनर्जी सिस्टम लेना हो तो एक मुश्त खर्चा होना है। सब्सिडी तो बाद में मिलेगी।

कांग्रेस इस मामले में आक्रामक है सरकार चल रही है सायं सांय बिजली के बिल आत है आय बाय,का नारा चल रहा है। कांसफूसी इस बात की भी है कि स्टील उद्योग लॉबी को छूट देने के पीछे की कहानी है। इनको ही सोलर एनर्जी की तरफ ले जाना था। लेकिन सरकार, अमीरों को खुश करना चाहती है।रोजगार जो देते है। उद्योगों में छत्तीसगढ़ के बजाय दूसरे राज्यों के निवासियों को रोजगार मिला हुआ है। छत्तीसगढ़ के मूल निवासी तो खेती किसानी और घरेलू मजदूर है। ऐसे लोगों को जूते दो पैसे लो कहना अन्याय है। वैसे भी एक सर्वे में प्रदेश के केवल 41प्रतिशत लोग सरकार से खुश है नाखुश लोग 59 प्रतिशत है। ये सर्वे बिजली बिल बढ़ने से पहले का है। बीस फीसदी लोग सायं सायं के कारण आय बाय नाराज है

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