भोपाल में परिवहन विभाग का बाबू के पास अरबों की संपत्ति मिली यह खबर देखी और सुनी होगी। इतनी बड़ी रकम कम समय में उसके उगाही कर ली। छत्तीसगढ़ में ऐसा ही कारनामा कुछ लोग कर रहे हैं, लेकिन यहां यह अफसरों के मिली भगत से चल रहा है। परिवहन विभाग में छोटे से बड़ काम में दलालों का बोलबाला है। छत्तीसगढ़ परिवहन विभाग में दलालों द्वारा नियमों का उल्लंघन कर ड्राइविंग लाइसेंस बनाने, कमर्शियल वाहनों के फिटनेस के नाम पर तय शुल्क से अधिक वसूली करने, और बिना ट्रायल के लाइसेंस जारी करने जैसे फर्जीवाड़े सामने आए हैं। यहां तक नियमों की अवहेलना कर बस और ट्रक चालक कैसे बच निकलते हैं। यह भी खेल चल रहा है।
परिवहन विभाग में ऐसे दलालों को ‘कटर’ कहा जाता है। इसमें विभाग के कुछ पुराने और नए खिलाड़ी कटर के रूप में काम करते हैं। जिन वाहन मालिकों के पास 50 से अधिक गाडियां हैं उनकी गाडी महीनों बिना किसी परमिशन और वैध कागजात के सड़कों पर दौड़ती नजर आती है। कटर ऐसे प्रकरण में हर गाड़ी के नाम एक पर्ची काटते हैं। पर्ची थाने में दिखाने के बाद उसे छोड़ दिया जाता है। एक वाहन के पीछे महीने में 4 हजार से अधिक की वसूली होती है।
यहां पर आरटीओं के अफसर भी मिले हुए हैं। परिवहन विभाग के आला अफसर से लेकर कई नामचीन चेहरे हैं। जब तक यह विभाग सीएम साय के पास था, परिवहन को पूरा काम रवि देखते थे। कटर के रूप में वह परिवहन के अन्य कर्मियों के साथ मिलकर पूरी वसूली करते हैं। अब विभाग के मुखिया बदल गए हैं लेकिन दलाल वही है।
अरबों का खेल परिवहन में महीने भर में होता है। कांग्रेस सरकार में जो लोग काम कर रहे थे वही लोग भाजपा के कार्यकाल में भी लगे हैं। नन्हे से लेकर बड़े अफसर तक केवल ‘गांधी’ की भाषा समझते हैं। परिवहन विभाग में चांदी काट रहे कटर के बारे में सभी अफसर और वहां के कर्मी जानते हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती। यहां पर उपर से लेकर नीचे तक गांधी का पूरा सम्मान होता है।

तभी विभाग ने हाई सिक्यूरिटी नंबर प्लेट के नाम पर निजी कंपनी के अवैध वसूली से आम लोगों को नहीं बचा पाए। यानि यहां पर भी कटर सक्रिय रहे और वे अफसरों का जेब भरते रहे।आखिर परिवहन से रवि और शंकर का प्रेम कैसा जो पिछली बार भी यहां थे और अब भी यहीं पदस्थ हैं। इमानदारी का चोला ओढ़े अफसरों को देखों समझों और जानों ।
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