बासी सरकार की 8 करोड़ की बोरे योजना!

भ्रष्टतम कांग्रेस सरकार ने पांच साल के कुशासन में इतना घोटाला कर गई है कि पूछो मत। हाल ही में एक नया घोटाला सामने आया है। बोरे बासी घोटाला। एक दिन में 75लाख मजदूर खोज लिए।पंडाल के भीतर बैठा भी दिए। इन मजदूरों में राजनैतिक मजदूर के रूप में भूपेश सरकार के पूरे मंत्री थे। बोरे बासी खाने वाला एक मंत्री दूसरे मामले में जेल में है।

पूरा प्रशासनिक अमला जमीन, पीढ़ा, डाइनिंग टेबल में बैठकर भले बोरे बासी न खाया हो लेकिन फोटो जरूर खिंचवाया। आदेश था। जनसंपर्क का आला अधिकारी भी शामिल था। कई आईएएस आईपीएस अधिकारी जिनका छत्तीसगढ़ या छत्तीसगढ़ी संस्कृति से कोई सरोकार नहीं है ,वे भी पनियाल भात के सामने बैठे दिखे। खाए न खाए लेकिन एक हजार वाला मेडल दस हजार में पहन कर स्वांग जरूर रचे।

बासी सरकार को किसी सलाहकार ने सीख दी थी कि ग्रामीण क्षेत्र की नकल करो, सत्ता में बने रहोगे। पंद्रह साल बाद सत्ता में आई कांग्रेस सरकार के मुखिया को भूख इतनी लगी थी कि पंद्रह साल का बोरे बासी पांच साल मे खाना था।लूट तो हर सरकार करती हैं लेकिन डकैत सरकार थी।हर योजना में भ्रष्टाचार!

कुछ आई ए एस और आईपीएस अधिकारियों सहित उचक्के लोगों की मंडली थी जिसमें बोरे बासी खाने वाला अनिल टुटेजा और सौम्या चौरसिया भी थी। दोनों साल भर से ज्यादा डाइनिंग टेबल कैसा होता है, देखे नहीं है। दोनों की बासी खाते फोटो गूगल में उपलब्ध है। छत्तीसगढ़ में पंद्रह साल से सत्ता में रहे भाजपा को हराने के बाद 2018में गाएं की संस्कृति का ढकोसला लेकर सरकार जनता के सामने आई। जनहित में काम करने का तमाशा किए। जल्दी ही जनता के समझ में आ गया कि नियत के खोटे है।नाम बड़े दर्शन छोटे है।

पांच साल मे भ्रष्ट्राचार की इतनी लंबी कड़ी लगा दी कि सैकड़ों अधिकारी जेल में सड़ रहे है या सड़ने जायेंगे। भाजपा सरकार को आर्थिक भ्रष्टाचार के निपटारे के लिए कम से कम तीन चार आईपीएस अधिकारी तैनात करना पड़ेगा। कई विभागों के भ्रष्टाचार के मामले में केंद्र और राज्य की सारी जांच एजेंसी जांच कर रही है। श्रम विभाग,इस कड़ी में जुड़ने वाला नया विभाग है,जहां के अधिकारी बता रहे है कि एक अधिकारी, जिसके बेटा बेटी, भ्रष्टाचार के जरिए डीसी बने है उसके निर्देश पर भ्रष्टाचार हुआ है। श्रम मंत्री ने फाइल बुला ली है याने एक और आईएएसअधिकारी सहित कई अधिकारी जेल जाने के लिए तैयार हो गए है

ग्रामीण संस्कृति के आड में भ्रष्ट्राचार की सारी सीमाएं लांघ देने वाले श्रम विभाग का एक नया घोटाला सामने आया है। बोरे बासी योजना। छत्तीसगढ़ गर्म प्रदेश है। गर्मी के चलते गांव के श्रमिक घर से निकलने से पहले रात को बने चांवल को सुबह पानी में बोर कर खाते है। इसे बोरे बासी कहा जाता है। इसके साथ प्याज, आचार दही खाने का चलन है। बोरे बासी को प्रतिष्ठा दिलाने के लिए श्रम दिवस याने एक मई को बोरे बासी खाने का काम शुरू हुआ। इसी के आड में भ्रष्ट्राचार की बासी,घोटाले का प्याज, रिश्वत और कमीशन का आचार परोस दिया। इतनी तेजी से बोरे बासी बना की सारे नियम ताक में रख दिया गया।श्रीवास्तव और अहलुवालिया को बुला कर भुगतान करने के व्यापक कार्य किया गया।

बोरे बासी घोटाला सामने आते ही बासी सरकार का बासी मुखिया फड़फड़ाने लगा। अपने कार्यकाल का घोटाला की जांच के बजाय उसके सरकार से बासी सरकार के घोटाले की जांच की मांग करने लगे। पांच साल सत्ता में थे तो होश नहीं रहा, अब खुद का हाथ सपड़ा रहा है तो बता रहे है फलाना भी चोर है।

बोरे बासी योजना घोटाले का खुलासा भाजपा के गौरी शंकर श्रीवास ने सूचना के अधिकार के जरिए निकाल कर बासी सरकार के बासी चेहरे पर एक और दाग दिखा दिया है। आठ करोड़ रुपए बिना नियमों के पालन किए “व्यापक” नाम की संस्था को दिया गया। डोम से लेकर मेडल तक हर सामग्री में भ्रष्ट्राचार किया गया है। भाजपा सरकार को पिछली सरकार के न तो केवल बोरे बासी योजना की जांच गंभीरता से करा कर दोषी अधिकारियों सहित इसके जरिए भ्रष्ट्राचार को पनपाने वाली व्यापक संस्था के कर्ता धर्ताओं के खिलाफ भी सख्त कार्यवाही करना चाहिए

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