शिक्षकों के हजारों पद खाली, फिर भी डफली बजा रहे शिक्षा विभाग के अफसर

रायपुर स्कूल शिक्षा विभाग में शिक्षकों की कमी पूरा करने किए गए युक्तियुक्त करण के बाद भी हजारों पद खाली है। 5 हजार पद की भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया है, वह ऊंट के मुंह में जीरा की तरह है। देखा जाए तो छत्तीसगढ़ में युक्तियुक्तकरण के बाद भी 22,464 शिक्षकों के पद रिक्त हैं, जिससे पढ़ाई व कक्षाओं पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। प्राइमरी में 7,957, मिडिल में 7,734 और हाई/हायर सेकेंडरी में 6,773 पद खाली हैं। यही वह संकट है जिसे युक्तियुक्तकरण से पूरा नहीं किया जा सका।

युक्तियुक्तकरण के दौरान कुछ स्कूलों में पदों का समेकन और कुछ पदों का समायोजन हुआ, पर भर्ती प्रक्रिया और स्थायी भर्तियों की कमी ने रिक्तियों को कायम रखा। गुणवत्ता युक्त शिक्षा का दंभ भरने वाले विभागीय सचिव परदेशी यहां पर पूरी तरह से फेल नजर आ रहे हैं। उन्होंने मंत्री के गुरु को अपना शागिर्द बना लिया है, लेकिन वे समायोजन के बाद किए गए तबादले और प्रतिनियुक्ति में फंसते नजर आ रहे हैं।
यह जोड़ी कर रही काम यहां पर चावरे और बंजारा की जोड़ी काम कर रही है।

इनमें यह कहा जा रहा है कि यादव के मंत्री बनने के बाद आशुतोष की बांझे खिल गई है। उनका रिश्ता अब गुरु और चेला का बन गया है। दोनों मिलकर नया खेल कर रहे हैं। वैसे विभाग में तो रिक्त पद हैं, वह बहुत ज्यादा हैं। एक समय शिक्षा विभाग में आरएन सिंह की तूती बोलती थी, वैसे ही अब चावरे यहां पर साबित हो रहे हैं।

दो माहतत लीड कर रहे
वैसे देखा जाए तो यहां पर परदेशी विभाग के प्रशासनिक तौर पर लीड कर रहे हैं, लेकिन फील्ड की समस्याओं से रूबरू नहीं हो पा रहे हैं। पूर्व शिक्षा मंत्री के समय संचालक यहां पर लीड करती थी। वैसे ही अब उनके संचालनालय के वे दो माहतत लीड कर रहे हैं। पिछले एक दशक से यहां बैठकर कहां से कितना और कैसे निकलेगा इसका पूरा गणित उन्हें मालूम हैं। अब अपने सेवा के अंतिम दौर में पूरा दंम लगाकर बटोरने में लगे हैं।

अब परदेशी ही दे ध्यान
अब देखना यह है कि आखिर समायोजन से असंतुष्ठ लोगों को वे कैसे मना पाते है। अधिकांश का मामला पूरी तरह से सही है। फिर भी जिले से संभाग स्तर की कमेटी ने परदेशी के दबाव में अधिकांश दावे निरस्त कर दिए। अब वे कोर्ट का रास्ता देख रहे हैं। हालांकि ऐसे शिक्षक जिन्होंने समायोजन के बाद ज्वाइन नहीं किया उन्हें सैलरी नहीं दी जा रही है। ऐसे में वे जिनके पास और कोई कमाई का जरिया नहीं वे वापस आ गए। और जो लड़ सकते हैं वे विभाग के निर्णय को चैंलेंज कर रहे हैं। अब सचिव को ध्यान देना चाहिए कि आखिर इतने सारे लोग क्यों असंतुष्ठ हैं। तभी शिक्षा और बच्चों का भविष्य उज्जवल होगा।

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