बस्तर में बैठा पीडीएस सिस्टम

छत्तीसगढ़ सरकार के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा प्रदेश के राशन कार्ड धारियों को माह जून में तीन माह का अनाज एक साथ देने के निर्णय को तुगलकी निर्णय जारी हुआ है। इस निर्णय के खिलाफ बस्तर संभाग के राशन दुकानदार हड़ताल में चले गए है। उनका मानना है कि ये व्यवस्था पुरानी सरकार द्वारा किए गए घोटाले पर पर्दा डालने का ये षड्यंत्र है। राज्य के गोदामों में चांवल रखने की जगह नहीं है जिसके कारण समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान का निराकरण नहीं हो रहा है। बरसात के मौसम में धान के खराब होने की संभावना को देखते हुए तीन महीने का चांवल एक साथ देने का निर्णय लिया गया है।

प्रदेश की तेरह हजार राशन दुकानो में 2022 से 2025 की अवधि में लगभग 48 लाख मीट्रिक टन चांवल बचत के रूप में पहले से ही रखा हुआ है। यदि इस मात्रा में घोटाला हुआ है तो विभाग राशन दुकानदारो से राशि वसूल करने के लिए राजस्व विभाग से वसूली करने के लिए पत्र लिख रहा है। वास्तविकता ये है कि प्रदेश में राजस्व वसूली के माध्यम से राशि जमा नहीं हो रही है। खाद्य संचालनालय का एक पूर्व अपर संचालक मातहत अधिकारियों से अवैधानिक रूप से बाजार से चांवल खरीदवा कर रखवाने का काम अलग से कर रहा है।

एक राशन कार्ड धारक को एक माह में औसतन 35किलो चांवल मिलता है। जिस परिवार में पांच से अधिक सदस्य है उन्हें हर सदस्य पीछे 7किलो चांवल अलग से दिए जाने का प्रावधान है। खाद्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार एक अधिकारी ने धान के नुकसान को बचाने के लिए तीन माह का चांवल एक साथ बंटवाने का आदेश निकलवाया है। इसके पहले के सालों में मार्च महीने से ही दो माह का चांवल वितरण करवा कर गोदामों की समस्या का निराकरण किया जाता था। इस बार ऐसा क्यों नहीं किया गया जांच का विषय है।

प्रदेश की 13 हजार राशन दुकानों में से शहरी क्षेत्र में जो राशन दुकानें है उनके गोदाम बहुत छोटे है जिसमें बमुश्किल 50 से 100 क्विंटल चांवल ही रखा जाता है। वे एक महीने का चांवल एक साथ न उठा कर दो तीन बार में उठाते हैं। तीन गुना चांवल देने पर चांवल कहां रखा जाएगा इसका कोई तरीका नहीं है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि दुकानदार अस्थाई रूप से गोदाम किराया लेकर रखेगा और इसकी सूचना खाद्य/राजस्व विभाग के अधिकारी को लिखित रूप से देगा। इस नियम का गंभीरता के साथ पालन करवाने की जिम्मेदारी खाद्य/राजस्व विभाग की है।

जिस पर निगरानी रखी जाएगी। तीन माह का चांवल गरीब जनता को दिया जाना भी आश्चर्य जनक है। एक महिला राशन कार्ड धारक एक साथ एक क्विंटल पांच किलो चांवल किस प्रकार राशन दुकान से घर ले जाएगी।गरीब लोग बहुत छोटे घर में रहते है।उनका किचन और भी छोटा होता है। इतनी मात्रा में चांवल को घर में बरसात के मौसम में कैसे सुरक्षित रखा जाएगा। सूत्रों की माने तो खाद्य मंत्रालय द्वारा अप्रैल 2025 में कराए गए भौतिक सत्यापन में पांच हजार से अधिक राशन दुकानों में अरबों का चांवल गायब पाया गया है। ये काम राशन चांवल बचत घोटाले को दबाने के लिए और विधानसभा जांच समिति का ध्यान भटकाने के लिए आम जनता को परेशानी में डाला जा रहा है।

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