भूपेश बघेल सरकार के नुमाइंदों ने गरीबों के शराब की आड में चोरी किए डकैती किए।गरीबों के चांवल शक्कर को भी नहीं छोड़ा। विधानसभा में खाद्य मंत्रालय के ही आंकड़े बता रहे है कि अरबों रुपए का घोटाला है। सोचिए कि एक पूर्व मुख्यमंत्री एक पूर्व विधान सभा अध्यक्ष दम लगाए तब जाकर विधान सभा जांच समिति बनी और जांच समिति के सामने प्रश्न के उत्तर में लगे आंकड़े सामने दिखे तो समिति के सभापति सहित सदस्यों के होश उड़ गए।
कांग्रेस शासनकाल में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डा रमन सिंह ने 600करोड़ रुपए के राशन घोटाले का मुद्दा उठाया था।पूर्व खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने ये कहकर बचने की कोशिश की थी कि भाजपा शासन काल में फर्जी राशन कार्ड बने थे इस कारण घोटाला हुआ है। बहरहाल लीपापोती खूब हुई। भाजपा शासन काल आने पर धर्म लाल कौशिक ने फिर मुद्दा उठाया। इस बार अध्यक्ष बने पूर्व मुख्यमंत्री डा रमन सिंह ने संसदीय मंत्री से जांच समिति से जांच करवाने का आश्वासन ले लिया।

खाद्य मंत्रालय और संचालनालय में अनिल टुटेजा और सौम्या चौरसिया के नुमाइंदों ने घोटाले को अंजाम दिया। मनोज सोनी के घर से करोड़ो रुपए बरामद हुए।दूसरे अधिकारी बचते रहे।हमर संगवारी के अध्यक्ष राकेश चौबे ने विष्णु देव साय के यहां शिकायत की।एक साल बाद जानकारी आई कि 600करोड़ के पीडीएस घोटाले के लिए जिम्मेदार अधिकारी को खाद्य संचालनालय से हटा दिया गया है। चांवल घोटाले की जांच अभी प्रगति पर है। विधान सभा समिति की सत्रह बैठक हो चुकी है। प्रश्न उत्तर का सिलसिला जारी है।
रायपुर के एक अखबार ने 115 करोड़ के शक्कर घोटाले को खबर पहले पेज पर प्रकाशित की है।संयोग ये भी है कि ईडी भी आज दस जगहों में छापेमारी की है। इस छापे में पूर्व खाद्य सचिव आलोक शुक्ला का घर भी शामिल है। वैसे भी न्यायालय ने आलोक शुक्ला के अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दिया है।इसका मतलब साफ है आलोक शुक्ला को गिरफ्तार होना होगा। हमर संगवारी के अध्यक्ष राकेश चौबे ने मुख्य मंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिख कर मांग की है कि जो अधिकारी जिम्मेदार है उसके द्वारा जांच को प्रभावित किया जा रहा है।इस अधिकारी को तत्काल निलंबित किया जाना चाहिए। राकेश चौबे ने मांग किया है कि घोटाले की जांच सीबीआई से कराया जाना चाहिए।
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