Breaking News

‘इलाज के साथ मां का स्नेह भी जरूरी’, दिल्ली हाई कोर्ट ने महिला को दी अंतरिम जमानत

दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि छोटे बच्चे के स्वास्थ्य का अधिकार केवल दवा और चिकित्सा तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे मां का स्नेह, स्पर्श और साथ भी उतना ही आवश्यक है। इसी आधार पर अदालत ने धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोपों में जेल में बंद एक महिला को अंतरिम जमानत प्रदान कर दी। कोर्ट ने कहा कि बच्चे के समुचित विकास और मानसिक स्वास्थ्य के लिए मां की मौजूदगी अत्यंत महत्वपूर्ण है, खासकर तब जब बच्चा कम उम्र का हो।

जस्टिस गिरीश कठपालिया एक महिला की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें उसने अपनी दो साल की बीमार बेटी की देखभाल के लिए अंतरिम जमानत की मांग की थी। महिला धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोपों में न्यायिक हिरासत में है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि इतनी छोटी उम्र के बच्चे को केवल दवाइयों और इलाज की ही नहीं, बल्कि मां के सुकून भरे साथ और स्पर्श की भी जरूरत होती है। इसे किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि महिला पर आरोप अवश्य हैं, लेकिन बच्ची की कम उम्र और उसकी खराब तबीयत को देखते हुए उसे मां के साथ रहने से वंचित नहीं किया जा सकता, खासकर बीमारी के दौरान। कोर्ट ने मानवीय आधार पर महिला को 10 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की एक जमानत पर 90 दिनों की अंतरिम जमानत प्रदान की है, ताकि वह अपनी दो साल की बेटी की देखभाल कर सके।

अभियोजन पक्ष ने महिला की जमानत का किया विरोध
दिल्ली हाई कोर्ट में महिला की अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने इसका विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि बच्ची की देखभाल के लिए परिवार के अन्य सदस्य मौजूद हैं, इसलिए जमानत की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, महिला के वकील ने अदालत के समक्ष बच्ची की मेडिकल रिपोर्ट पेश की और उसकी गंभीर स्वास्थ्य स्थिति का हवाला दिया। रिपोर्ट को देखने के बाद अदालत ने माना कि बच्ची की कम उम्र और बीमारी को देखते हुए मां की मौजूदगी बेहद जरूरी है।

इसी आधार पर कोर्ट ने महिला को 10 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की एक जमानत पर 90 दिनों की अंतरिम जमानत दे दी, ताकि वह अपनी दो साल की बीमार बेटी की देखभाल कर सके। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सिर्फ इस आधार पर कि अन्य रिश्तेदार मौजूद हैं, बच्चे को मां से या मां को बच्चे से अलग नहीं किया जा सकता।

गौरतलब है कि 3 फरवरी को भी दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अन्य मामले में आरोपी को अंतरिम जमानत दी थी, ताकि वह अपनी मां की सर्जरी के दौरान उनके साथ रह सके। उस समय भी कोर्ट ने कहा था कि केवल इसलिए कि देखभाल के लिए अन्य रिश्तेदार मौजूद हैं, बेटे को अपनी मां के पास रहने के अवसर से वंचित नहीं किया जा सकता।

Check Also

‘उंगली पकड़कर आए और अब गला दबाने लगे…’, CM योगी का बड़ा बयान, कहा- मुगलों-अंग्रेजों ने भारत को तबाह कर दिया

सीतापुर। जिले के तपोधाम सतगुरु गिरधारी नाथ जी महाराज आश्रम में सीएम योगी ने जनसमूह …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *