पंजीकृत आवासीय समितियाें में मेंटनेंस शुल्क को लेकर रजिस्टार, फर्म सोसायटी ने मांगे प्रस्ताव, अधिनियम में सामाजिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक प्रयोजनों का उल्लेख

रायपुर। पंजीकृत आवासीय समितियों द्वारा मेंटेनेंस शुल्क लिए जाने के संबंध में रजिस्ट्रार, फर्म्स और सोसायटी ने समितियों से उनके उपनियमों में संशोधन के प्रस्ताव मांगे हैं। यह मेंटेनेंस शुल्क के संबंध में पारदर्शिता लाने और एक समान नीति बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है, क्योंकि इस मुद्दे पर अक्सर समितियों के बीच विवाद होते रहते हैं।

शुल्क लेना अनिवार्य: एक हाउसिंग सोसायटी का हिस्सा होने के नाते, निवासियों के लिए रखरखाव शुल्क (मेंटेनेंस चार्ज) का भुगतान करना अनिवार्य है, क्योंकि इसका उपयोग सुरक्षा, सफाई, पानी की आपूर्ति और अन्य साझा सुविधाओं के प्रबंधन के लिए किया जाता है। रजिस्ट्रार ने समितियों से उनके मौजूदा उपनियमों में संशोधन के लिए प्रस्ताव 15 दिन मेें भेजने कहा है। इन प्रस्तावों में रखरखाव शुल्क की संरचना, बकाया राशि पर जुर्माना, और अन्य वित्तीय नियम शामिल हो सकते हैं। इसका उद्देश्य अधिनियम के तहत स्पष्टता लाना, विवादों को कम करना और समितियों के संचालन को सुव्यवस्थित करना है।

आबंटन के 3 माह में सोसायटी बनाना अनिवार्य
रियल एस्टेट सेक्टर का रेगुलेशन कर इस सेक्टर में पारदर्शिता व दक्षता लाने तथा उपभोक्ताओं के हितों को संरक्षित करने के उद्देश्य से 1 मई 2017 से भू-संपदा (विनियमन और विकास) अधिनियम लागू किया गया। अधिनियम की धारा 11 में वर्णित प्रावधानों के अनुसार किसी रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में 50 प्रतिशत से अधिक आबंटितियों (केताओं) द्वारा अपना प्लाट, अपार्टमेंट, भवन बुक कराने के 3 माह के अवधि के भीतर अनिवार्य रूप से उनका एसोसिएशन या सोसायटी या सहकारी सोसायटी बनाए जाने का प्रावधान है। अधिनियम में वर्णित प्रावधानों के अनुसार ऐसी रहवासी सोसाटियों द्वारा ही संबंधित कॉलोनियों के दैनिक रख-रखाव व प्रबंधन संबंधी कार्य किये जाने है।

अधिनियम में दैनिक रख-रखाव का प्रावधान नहीं
रजिस्ट्रार, फर्म्स एवं संस्थाएं, छत्तीसगढ़ द्वारा छत्तीसगढ़ सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम के तहत ऐसी सोसायटियों का पंजीयन सोसायटी अधिनियम की धारा 2 में दिए प्रावधानों के अनुसार सामाजिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक प्रयोजनों के लिए निर्मित सोसायटियां ही प्रशासित होती है, इसमें सोसायटियों के दैनिक रख-रखाव के प्रावधान वर्णित न होने के कारण उक्त अधिनियम के तहत् रजिस्टर्ड रहवासी सोसाटियों के वास्तिविक उद्देश्यों की पूर्ति नहीं होती है। रियल एस्टेट प्रोजेक्ट अंतर्गत आबंटितियों, रहवासियों की ऐसी सोसायटी को छत्तीसगढ़ सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम के तहत् पंजीकृत न करते हुए छत्तीसगढ़ को-ऑपरेटिव एक्ट के तहत् पंजीकृत किये जाने के निर्देश हैं।

आनंद बिहार रेसीडेटस सोसायटी का पंजीयन निरस्त
इन्हीं निर्देशों के अंतर्गत छत्तीसगढ़ सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम के तहत आनंद विहार रेसीडेंटस विकास सोसायटी, रायपुर पंजीकृत है। सोसायटी द्वारा दैनिक रख-रखाव संबंधी कार्य किया जा रहा है एवं उसके लिए शुल्क लिया गया है, जो संस्था के पंजीकृत उददेश्यों के विपरीत है। उक्त समिति के विरूद्ध शिकायत प्राप्त होने पर समिति का पंजीयन छत्तीसगढ़ सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम के तहत् निरस्त किया गया है।

360 पंजीकृत सोसायटी 15 दिन में मांगे प्रस्ताव
रजिस्ट्रार, फर्म्स एवं संस्थाएं, छत्तीसगढ़ द्वारा इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1973 के अंतर्गत पंजीकृत कुल 360 रहवासी, आवासीय, परिसर को सूचित गया है कि यदि आपके उददेश्यों में धारा 2 के विपरीत मेंटेनेंश/ रख-रखाव है, तो वे समितियां 15 दिवस के भीतर उदश्यों में संशोधन हेतु ऑनलाइन प्रस्ताव प्रस्तुत करें। उक्त की स्थिति में शिकायत प्राप्त होने पर समिति का पंजीयन अधिनियम की धारा 34 के अधीन निरस्त कर दिया जावेगा।

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