Breaking News

डकैत आई ए एस अफसर विवेक ढांड ,मन्मथ राउत, आलोक शुक्ला, सुनील कुजूर और बाबूलाल अग्रवाल

समाज में पेशेवर अपराधियों से खतरनाक वे सरकारी अधिकारी खतरनाक है जो संवैधानिक रूप से सरकारी सेवा करते है, वेतन पाते है इसके बावजूद अवैध रूप से संगठित अपराध को अंजाम देते है छत्तीसगढ़ के पांच आई ए एस अफसरों पर आरोप लगा है।आरोप भी बहुत घृणित है, जिसकी जांच उच्च न्यायालय के निर्देश पर सीबीआई को करना है वह भी 15 दिन के भीतर घोटाले से जुड़े दस्तावेजों को जप्त भी करना है।

हमारे समाज में दो प्रकार के लोग है। पहले वे लोग है जो शारीरिक रूप से सक्षम है दूसरे वे लोग है जो शारीरिक रूप से असक्षम है। इन्हें दिव्यांग का नाम दिया गया है। सरकार ऐसे लोगों को मुख्यधारा में जोड़ने के लिए अनेक कार्य करती है और नहीं कर पाती है तो गैर सरकारी संगठनों से कार्य करवाती है। इस प्रकार के कार्य को करवाने के लिए ये बात भी सभी को मालूम है कि गैर सरकारी संगठन को जन्म देने वाले कौन हुआ करते है। जब एनजीओ जैसा शब्द प्रचलन में आया था तब सरकारी अधिकारियों की पत्नियां, रिश्तेदारों ने खूब संगठन बनाए।रिश्वत के पैसे को संगठन में डाल कर एक नंबर करने का खेल खूब चला। विदेशों से खूब अनुदान लिया गया,समाज सेवा का ढोंग भी दिखा। वक्त के साथ कुकुरमुत्ते के समान जन्मे गैर सरकारी संगठन मर भी गए।

रायपुर से बीस किलोमीटर की दूरी पर एक नगर पंचायत है – माना। जब तक विवेकानंद विमानतल का नामकरण नहीं हुआ था तब तक माना के एयरपोर्ट के नाम से ये ग्राम सारी दुनियां में जाना जाता था। विस्थापित बंगला देश निवासी यहां रहते है।इस नगर पंचायत में वृद्धा आश्रम, मनोरोगी सुधार, बाल आश्रम सहित अनेक ऐसी संस्था जो महिला एवं बाल विकास विभाग सहित दीगर कल्याणकारी विभागों द्वारा संरक्षित होती है।

छत्तीसगढ़ के पांच भ्रष्ट अधिकारी जिसमें एक पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांड (शराब घोटाले के योजना कर्ता, जांच एजेंसी के अनुसार), आलोक शुक्ला (नान घोटाले में उच्च न्यायालय के निर्देश पर गिरफ्तार), बाबूलाल अग्रवाल (छत्तीसगढ़ राज्य के पहले बर्खास्त आई ए एस अधिकारी) सहित सुनील कुजूर और मन्मथ राउत ने माना गांव को चयनित क्यों किया? जहां दस समाजसेवी संस्था चल रही हो वहां एक तो ढंक ही जाएगा। घोटाले के लिए सेघे सरकारी आदमियों ने समाज के उपेक्षित और अपेक्षित विकलांग लोगों को टारगेट किया। फर्जी संस्था बनाई और अंतरास्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं को चूना लगाने के लिए धंधा खोज लिया।

इस काम को अंजाम देने के लिए दो विप्र अधिकारी मिश्री लाल पांडे और अशोक तिवारी आगे आए। वैसे भी महिला बाल विकास विभाग में इन दोनों अधिकारियों ने मृतकों के नाम पर सरकारी पैसे को खूब काला पीला किया। क्या आप सोच सकते है कि पांच पांच आई ए एस अफसर एक योजना से 100-200करोड़ रुपए विकलांग के नाम पर डकार गए हो?

ये सच्चाई है, जिसका खुलासा कुंदन सिंह ने किया। कुंदन सिंह के नाम पर दो जगह से वेतन निकाले जाने के चलते ही खुलासा हुआ था। इस व्यक्ति के द्वारा सूचना का अधिकार अंतर्गत जानकारी मांगे जाने पर धमकी दी गई थी। आज सच सामने है। विकलांगों के नाम पर फर्जी कृत्रिम पैर बनाने की फैक्ट्री खोली गई। 4314 कृत्रिम पैर बांटे गए। 2004 से 2018 तक हर दिन 18से 20 मरीजों का इलाज किया गया। 17कर्मचारी काम करते थे जिनके नियुक्ति के लिए कोई विज्ञापन नहीं निकाला गया। एक संस्था जो विश्व बैंक से अनुदान ले रही हो उसका 14 साल ऑडिट नहीं हुआ।

इसका साफ मतलब है कि आर्थिक अपराध सुनियोजित था।
उच्च न्यायालय में इस बात का भी बड़ा विरोध हुआ कि जांच सीबीआई न कर राज्य की पुलिस करे। उच्च न्यायालय ने माना कि जिस स्तर के अधिकारी भ्रष्ट्राचार किए है उनके दबाव में निष्पक्ष जांच नहीं हो सकेगी। ये टिप्पणी राज्य के पुलिस के लिए “तमाचा”है।जो ये सिद्ध करती है कि राज्य की पुलिस निष्पक्ष नहीं है। उच्च न्यायालय के निर्णय में सीबीआई को 15 दिन के भीतर सारे रिकॉर्ड जप्त करने के निर्देश है। बैंक में जमा की गई राशि और निकाली गई राशि प्रमाण है वैसे तो प्रमाणों की संख्या 31है। विकलांगों के नाम पर पैसा खाने वाले सारे आईएएस अधिकारी और राज्य के अधिकारी बड़े डकैत है साथ है संवेदनहीन है।इन सभी को जेल में जाने का हक है।

Check Also

आज कांग्रेस का हल्ला बोल प्रदर्शन, मनरेगा बचाओ समेत कई मुद्दों को लेकर विधानसभा का करेगी घेराव, सचिन पायलट भी होंगे शामिल

CG News: छत्तीसगढ़ कांग्रेस आज मनरेगा बचाओ संग्राम के साथ जनहित के मुद्दों को लेकर …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *