कीर्तिमान राठौर निलंबित क्यों नहीं किए गए!

रायपुर: भैंसाझार चकरभाठा वितरक निर्माण में अनियमितता किए जाने पर कलेक्टर बिलासपुर के जांच प्रतिवेदन में 5 राजस्व विभाग के अधिकारी जिनमें अनुविभागीय अधिकारी राजस्व से लेकर तहसीलदार, पटवारियों के विरुद्ध कार्यवाही प्रस्तावित की गई थी। इनमें से केवल आनन्दरूप तिवारी(तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी राजस्व एवं भूअर्जन अधिकारी कोटा) को निलंबित किया गया और मुकेश साहू (पटवारी संकरी) को बर्खास्त कर दिया गया है।

मामला एक ही खसरे को अलग अलग बता कर 3.42करोड़ रुपए के मुआवजे के भुगतान का मामला था। कांग्रेस शासनकाल में संरक्षण प्राप्त कीर्तिमान राठौर को बचाने के लिए दोबारा जांच का खेल खेला गया और केवल मुकेश साहू पटवारी संकरी को दूसरे जांच प्रतिवेदन अनुसार बर्खास्त कर दिया गया।

कांग्रेस शासनकाल में हर विभाग में भ्रष्ट्राचार चरम में था। कांग्रेस संरक्षित अधिकारी छाती पर मूंग दल रहे थे। बिलासपुर के तत्कालीन कलेक्टर सौरभ कुमार ने ज्ञापन क्रमांक 459/अधि/23बिलासपुर दिनांक24फरवरी 2023को भैंसाझार चकरभाठा वितरक निर्माण में अनियमितता के लिए दो अनुविभागीय अधिकारी राजस्व और भू अर्जन अधिकारी सहित एक तहसीलदार और दो पटवारी के विरुद्ध कार्यवाही प्रस्तावित की थी।

कांग्रेसी नेताओं ने 3.42 करोड़ रुपए में से आधा राशि झोरकर
सौरभ कुमार के जांच आदेश को रद्दी में डालकर दूसरे कलेक्टर अवनीश शरण से जांच कराई गई। अवनीश शरण ने चार अधिकारियों को क्लीन चिट देकर केवल पटवारी मुकेश साहू को बर्खास्त कर दिया। भाजपा के सत्ता में आते ही 3.42करोड़ मुआवजे की राशि को लेकर हल्ला मचा तो इसी महीने के 3जून 2025को आनंदरूप तिवारी (तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी राजस्व और भू अर्जन अधिकारी कोटा) को निलंबित कर दिया गया।

प्रश्न ये है कि अगर तत्कालीन कलेक्टर सौरभ कुमार के जांच अनुसार कार्यवाही हुई है तो तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी राजस्व और भू अर्जन अधिकारी कीर्तिमान राठौर (वर्तमान अपर कलेक्टर रायपुर) को भी तत्काल निलंबित किया जाना चाहिए था। सूत्रों की माने तो कीर्तिमान राठौर को निलंबित न किए जाने के पीछे बिलासपुर जिले के एक मंत्री के संरक्षण की बात सामने आ रही है.

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