आमतौर पर “पति” शब्द को विवाह संस्कार से जोड़ कर विवाहित पुरुष के लिए इस शब्द को संकुचित कर दिया जाता है। संस्कृत भाषा में पति का अर्थ “प्रमुख,” होता है। सेना का पति याने सेना प्रमुख अर्थात – सेनापति। गणों के पति – गणपति याने गणों के प्रमुख। गणपति के पिता शिव की सेना गणों की थी जिसमें नंदी,भैरव, वीरभद्र, मणिभद्र, चंदिस, जय विजय,श्रृंगी,शैल गोकर्ण, भृगिरिटी प्रमुख गण थे। शिव ने गणेश याने गणों के ईश को गणपति बनाया था।
अपने बुद्धि बल के चलते प्रथम पूज्य हुए और विघ्नहर्ता भी बने। भारत की आजादी में सबसे बड़े संगठनकर्ता बने अंग्रेजों के द्वारा देश में बैठक और सभा पर अनेक प्रकार की पाबंदी थी।1891में बाल गंगाधर तिलक ने ग्वालियर के गणेश उत्सव के बारे में जाना और 1893में सार्वजनिक गणेश उत्सव की शुरुवात पुणे में की। ये काम देश की आजादी की रूपरेखा बनाने के लिए था। अंग्रेज, देश की धार्मिक भावना को समझते थे या यूं कहे डरते थे सो गणेश उत्सव में बने सार्वजनिक पंडालों में आजादी की रणनीति बनने लगी। गणेश देश की आजादी के रणनीतिकारों के प्रमुख बने। ये मानना भी जरूरी है कि अगर तिलक को आगे किया जाता तो ये देश चालीस साल पहले आजाद हो जाता क्योंकि तिलक ने “स्वतंत्रता मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और इसे मै लेकर ही रहूंगा” कहा था।
गरम दल के बाल गंगाधर तिलक उपेक्षित हुए लेकिन उनके सार्वजनिक गणेश उत्सव की विचारधारा आज के युग में भी प्रासंगिक है। धर्म, लिंग, जाति, संप्रदाय से ऊपर है गणेश उत्सव। अलग अलग राज्यों में गणेश के पर्यायवाची नाम चलते है।कर्नाटक में विनायक कहलाते है। तमिलनाडु में पिल्लेयार, महाराष्ट्र में विनायक के नाम से जाने जाते है सावरकर का नाम भी विनायक ही है। आज गली मोहल्ले, सहित घर घर में गणेश विराजे जा रहे है। सार्वजनिक गणेश का आकार और रूप भव्य से भव्यतम होते जा रहा है।इस कार्य को हिन्दू धर्म के प्रचार और प्रसार के संदर्भ में भी देखा जा सकता है। पिछले ग्यारह सालों में गणेश उत्सव देश भर में अपनी साख बढ़ाते जा रहा है। इसे प्रथम पूज्य का आशीर्वाद भी माना जाना चाहिए।
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