सूदखोर पर चला हथौड़ा, जमीन के डकैत पर क्यों नहीं कार्रवाई, निगम दे जवाब, मूणत अपने क्षेत्र में ध्यान दें

रायपुर।नगर निगम ने एक सूदखोर पर ताबडतोड़ कार्रवाई कर उसके निर्माण को ढहा दिया। वहीं समता कॉलोनी के एक जमीन के डकैत के व्यावसायिक कॉम्पलेक्स को तीन नोटिस देने के बाद भी अब तक बचा कर रखा है। देखा जाए तो कानून की धमक दोनों मामलों में एक सी होनी चाहिए थी, पर ऐसा नहीं हुआ। एक मामला पूरी तरह से अपराध की श्रेणी में है, वहीं दूसरा मामला उससे भी बड़ा अपराध की श्रेणी में आता है।

तोमर ने तो अपने पैसे वसूलने के लिए धमकी चमकी किया। लेकिन समता सोसायटी में अफसर बहु के सांठगांठ से शासन के रिकार्ड में ही हेरफेर कर दिया। शासकीय रिकॉर्ड में हेरफेर करना एक गंभीर अपराध है, जिसे जालसाजी और धोखाधड़ी के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है। इसे भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध माना जाता है।

इसमें आठ धाराएं लगती है। वैसे यह बताने की आवश्यकता इसलिए पड़ रही है कि निगम ने अपने स्तर पर तीन नोटिस जारी की है। नोटिस का तामिल होने के साथ निर्माण रूकवा दिया गया, लेकिन आगे की कार्रवाई अफसर बहु फोन के कारण जोन प्रभारी ने रोक दिया। निगम की सत्ता भाजपा के पास है। जीरो टालरेंस का दंभ भरने वाली सरकार में ऐसे मामले पर भी निगम प्रशासन के हाथ कार्रवाई करने से कांप रहे हैंं, तो इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है।

मूणत मामले में संज्ञान लें
शहर के पश्चिम एरिया में आने वाले इस प्रकरण पर वहां के विधायक मूणत जी संज्ञान क्यों नहीं लेते। वे निगम के हर मामले में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते हैं, पर दास्तावेज प्रमाण होने के बाद भी इस बड़ी गड़बड़ी को क्यों दूर नहीं करते। विधायक महोदय से अनुरोध है कि समता कॉलोनी के शांति देवी महोबिया पंसारी के मामले में निगम प्रशासन को पूरी सख्ती के साथ कार्यवाही के लिए कहें। ताकि पश्चिम विधानसभा की जनता कह सके कि उनका विधायक पूरी तरह से जनहित के मामलों में अपने जतना के साथ हैं।

महापौर की चुप्पी से संदेह
निगम में बिना पंजीयन का दस्तावेज दिए बी-1 के आधार पर नक्शा पास करने का जो खेल हुआ है, उस पर महापौर मीनल चौबे को भी संज्ञान में लेकर जोन प्रभारी को कठोर कार्यवाही के लिए कहना चाहिए। ताकि सुदखोर की तरह जमीन के डकैतों पर नकेल कस सकें। वैसे पिछले छाह माह से नोटिस के बाद निगम प्रशासन का मूक दर्शक बनना यही दर्शाता है कि मामले में कोई दबाव है। वैसे मामले में महापौर की चुप्पी से संदेह हो रहा है। एक भू-स्वामी अपने ही सामने अपनी जमीन की चोरी होते देख शासन की करतूत पर रो रहा है। और महापौर उसके आंसू नहीं पोंछ पा रही है।

फर्जीवाड़े का अनोखा नमूना
एक मामला उजागर होने के बाद समता सोसायटी में जमीन की गड़बड़ियों के और कई प्रकरण आने लगे हैं। समात सोसायटी के वकील और उनके परिजनों नाम पर 1984 में ली गई जमीन के पूरे मामले पर रिकार्ड का मिलान करना चाहिए। वैसे पूरा दास्तावेज फर्जीवाड़े का अनोखा नमूना है।

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