पांच साल तक मनमर्जी से छत्तीसगढ़ में आतंक फैलाने वाले भूपेश बघेल को डर लगने लगा है। शराब घोटाले में दिल्ली के तर्ज पर अगर जांच एजेंसी आगे कार्यवाही करती है ,करेगी ही तो भूपेश बघेल का जेल जाना तय है। 2100करोड़ रुपए के शराब घोटाले में जांच एजेंसी को तत्कालीन आबकारी मंत्री कवासी लखमा, निरंजन दास,अनवर ढेबर, अरूण पति त्रिपाठी सहित आबकारी विभाग के 29अधिकारियों के अलावा छोटे छोटे हिस्सेदारों को मिले पैसे की जानकारी मिल चुकी है। भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल के ऊपर एक हजार करोड़ रुपए के इधर उधर करने का आरोप है। कांग्रेस पार्टी के ढाई साल से फरार कोषाध्यक्ष राम गोपाल अग्रवाल के ऊपर भी दो तीन सौ करोड़ के लेन देन की चर्चा है।

इसके बावजूद जांच एजेंसी मान रही है कि लगभग पंद्रह सौ करोड़ का बड़ा वारा न्यारा है। एक एक करके सभी जेल में पहुंच चुके है। सरदार खोजा जा रहा है। नाम भी है, प्रमाण भी है, बस सही वक्त के इंतजार का है। विवाह का वर्षगांठ, जन्मदिन, राष्ट्रीय आयोजन या विधान सभा सत्र,का दिन निकलना शेष है। अपने कार्यकाल में छोटी छोटी बातों के लिए लोगों को जेल भिजवाने वालो को खुद के जेल जाने का डर सता रहा है। सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए है,अग्रिम जमानत के लिए। एक तरफ जेल यात्रा को पुरखौती मानने वाले को संवैधानिक उपचार का अधिकार है कि जमानत के लिए कोशिश करे।जांच एजेंसी को भी अधिकार है कि घोटाला करने वालो को बख्शे नहीं।

कानून के नजर में सभी बराबर है। देश या राज्य का संवैधानिक प्रमुख की जिम्मेदारी है कि उसका आचरण पाक साफ हो। छत्तीसगढ़ को मांडवा समझने वाले को आज नहीं तो कल तो जेल जाना है। पिता जी के कारण जोगी की सरकार गई, खुद के कारण डा रमन सिंह की सरकार गई।बेटा के कारण मोदी सरकार जाएगी ।आखिरकार विष्णु देव साय की सरकार को हटाने का जिम्मा तो भूपेश बघेल को लेना पड़ेगा। इसके लिए पहली शर्त है कि जेल यात्रा करनी पड़ेगी।

आज एक ताज्जुब वाली बात भी देखने को मिली।सारे समाचार संबंधित एजेंसियों ने हेडिंग लगाई है” डर के चलते भूपेश बघेल सुप्रीम कोर्ट पहुंचे”। भूपेश बघेल की सरकार में प्रेस सेंसरशिप लगा हुआ था। पुलिस वाला गुंडा, जन संपर्क संचालनालय में बैठ कर तय करता था कि हेडिंग क्या होगी, समाचार क्या होगा, कैसा होगा। सारी हेकड़ी निकल गई है। भूपेश बघेल जी कर्मों का लेखा जोखा यही खत्म करना होगा। पाप करने का फल यही मिलना है।
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