MP News: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर और धार्मिक नगरी उज्जैन पिछले 24 घंटे से लगातार बारिश की मार झेल रहे हैं. झमाझम बारिश से जहां उज्जैन में शिप्रा नदी उफान पर है और घाटों के मंदिर डूब चुके हैं, वहीं इंदौर की सड़कें नदियों में बदल गई हैं. दोनों शहरों के निचले इलाकों में जलभराव से लोगों को भारी परेशानी हो रही है और प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है.
छोटे मंदिर और दुकानें डूबे
महाकाल की नगरी उज्जैन में पिछले 24 घंटे से लगातार बारिश हो रही है. इसके चलते शिप्रा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है. रामघाट के किनारे बने छोटे मंदिर पानी में डूब चुके हैं और बड़े मंदिरों के सिर्फ शिखर नजर आ रहे हैं. घाट तक पानी पहुंच जाने के कारण यहां बनी छोटी दुकानें डूब गई हैं. सुरक्षा को देखते हुए पुलिस ने श्रद्धालुओं को घाट तक जाने से मना कर दिया है और बैरिकेडिंग कर दी गई है. लगातार अनाउंसमेंट किया जा रहा है कि लोग घाट के पास न जाएं. इस सीजन में पहली बार शिप्रा में इतना पानी देखने को मिला है, हालांकि पिछले वर्षों के मुकाबले यह स्तर अभी भी कम है.
इंदौर में सड़कें बनीं नदियां
इंदौर में भी बुधवार रात से तेज बारिश का दौर जारी है. 12 घंटे में करीब 4 इंच बारिश दर्ज की गई है. रातभर हुई बारिश से निचली बस्तियों में घुटनों तक पानी भर गया. कई जगह सड़कें नदी जैसी लगने लगीं. बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन के आसपास पानी भरने से यात्रियों को परेशानी हुई. शहर की यातायात व्यवस्था भी बिगड़ गई, कई वाहन पानी में बंद हो गए और लोगों को गाड़ियों को धक्का लगाना पड़ा. देवास नाका और निपानिया जैसे इलाकों में ऑफिस पहुंचने के लिए लोगों को बार-बार रास्ते बदलने पड़े.
डैमों से छोड़े गए पानी ने बढ़ाई चिंता
इंदौर में यशवंत सागर डैम के छह गेट खोले गए हैं, जबकि सिरपुर तालाब का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है. कान्ह नदी के किनारे कृष्णपुरा पुल के पास हालात गंभीर हो गए थे. पानी का स्तर अचानक बढ़ने से दो लोग बीच में फंस गए, जिन्हें समय रहते सुरक्षित निकाल लिया गया.
वहीं उज्जैन शहर की पानी की जरूरत पूरी करने वाला गंभीर डैम पहले ही अपनी क्षमता तक भर चुका है. इसकी कुल क्षमता 2250 एमसीएफटी है और कुछ दिन पहले ही पानी ज्यादा होने पर एक गेट खोलना पड़ा था. खास बात यह है कि डैम का भरना इंदौर के यशवंत सागर डैम से छोड़े गए पानी की वजह से हुआ, उस समय उज्जैन में बारिश नहीं हो रही थी.
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