भाजपा के वरिष्ठ नेता ननकी राम कंवर के अल्टीमेटम से सरकार उठक-बैठक करने में लगी है। कोरबा के रामपुर से कई बार विधायक रहे ननकी राम सीधे तौर व्यवस्था को करीब से देखिते हैं। जिला प्रशासने के कामकाज को लेकर उन्होंने पूर्व में भी सवाल उठाए। उनके सब्र का बांध टूटने के बाद सीधे सांय-सायं सरकार से भिड़ गए। उन्होंने तीन दिन में कलेक्टर को न हटाने पर अनिश्चित कालीन धरना का ऐलान कर दिया। अब सरकार को मजबूरी में कोरबा कलेक्टर अजीत बसंल को हटाना पड़ रहा है। उनके साथ चार से पांच जिलों कलेक्टर भी बदले जा रहे हैं।
ऐसी सूचना है कि सीएम सचिवालय का जिक्र उनके पत्र में आया है। ऐसे में सचिवालय को भी हैंडल करने का मन बना लिया गया है। यहां पर जो अफसर हैं, वे अपने काम के प्रति डेडिकेटेड तो हैं, पर मौके पर चौका मारने से नहीं भूलते। सत्ता का केंद्र होने के कारण सब लोग सीएम हाउसके रूख का इंतजार कर रहे हैँ। सीएम को पत्र आने के बाद यह कहना पड़ा की उनके पत्र के आधार पर मामले की जांच भी करा रहे हैं। सरकार बनने से पहले ही कोयले के दलाली को लेकर उन्होंने शिकायत की थी। डीएमएफ की राशि का गाेलमाल करने वाले कोरबा के पूर्व कलेक्टर जो अब सीएम के सचिव है उन पर आरोप लगे। आज वे ही अजीत बसंल का संरक्षण देने मेंआगे हैं। कल उनका भी नंबर लगेगा। फिर ननकी जैसा ही कोई खड़ा होगा।
अब यह कहा जा रहा है कि उनकी जो भी शिकायत और पीएमओं के द्वारा जांच के लिए लिखे गए सारे मामले सीएम सचिवालय में दबाने वाले अफस्रर वही पंडित हैं। वैसे कहा जाता है कि अगर ननकी के दबाव मेें सरकार सांय-सांय कर रही है, तो पार्टी के अन्य नेताओं का भी मनोबल बढेगा और वो भी दूसरे तरीके से अपना काम निकलवाएंगे। अगर मामला सच है तो सीएम को यह देखना चाहिए कि उनकी पार्टी के नेता क्यों खफा हैं। वैसे भी सरकार बनने के दो साल बाद उन्ही लोगों के लाभ मिला जो पदाधिकारी रहे हैं।
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