छत्तीसगढ़ में कुछ महिलाओं की महत्वाकांक्षा इतनी बढ़ गई है कि वे पैसे कमाने के लिए कुछ भी पैतरे आजमाने के लिए तैयार है। महत्वपूर्ण सरकारी पद पर कार्यरत महिलाओं को सरकार समानता के आधार वेतन एवं अन्य सुविधाएं दे रही है। शासकीय पद पर एक नंबर के पैसे के अलावा दो नंबर का भी अवैध पैसे भ्रष्ट्राचार के जरिए मिलता ही है। इससे भी आगे जाकर कुछ महिलाएं सरकार को, विभाग को और। खासकर महिलाओं को शर्मसार कर रही है।
भ्रष्ट्राचार करना सरकारी अधिकारियों के लिए अनिवार्य है अन्यथा आदिवासी जिलों का विकल्प खुला हुआ है। ट्रांसफर का डर ऐसा डर है कि सपने में भी ट्रांसफर दिख जाए तो सुबह सबसे पहले ये पता लगाया जाता है कि ट्रांसफर की कोई फाइल चल नहीं रही है? इसके अलावा बेगारी अलग समस्या है जिसे निभाने के लिए भ्रष्टाचार जरूरी है। सरकारी सेवा में कुछ महिलाएं धनार्जन के अलावा एक सपना देखती है वह है किसी के पुरुष के घर को तोड़ने का और अपने साम्राज्य को स्थापित करने का। जब भी कभी ये बात सामने आती है कि कोई महिला आगे होकर किसी विवाहित व्यक्ति के घरेलू मामले में दखलंदाजी कर रही है तो संकुचित समाज में कानाफूसी होती है।
कांग्रेस की सरकार सत्ता में आई तो एक बात दबी और खुले जुबान में पूछा गया कहा गया कि इतने समर्थ कांग्रेस विचारधारा के समर्थक आईएएस अधिकारियों के रहते राज्य सेवा की एक महिला अधिकारी को इतना पावर क्यों दिया गया? महज विधान सभा में एसडीएम होना ही पर्याप्त था या कहानी में कोई ट्विस्ट था। महज एक साल में नदिया के पार की गूंजा ,महारानी बन गई, रानी का क्या हुआ? ये बात नेपथ्य में छोड़ते है। गूंजा से महारानी बनने का सफर बड़ा सीधा था। मुख्यमंत्री के कार्यालय के सामने आसंदी लगाकर लाइन ऑफ कंट्रोल खींच दिया गया। इस लाइन को पार करने से पहले महारानी को पार करना अनिवार्य था। सरकार में कुछ प्रथम श्रेणी से लेकर चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी, सत्ता की धुरी को समझते है।”जिधर बम उधर हम” का पालन करने वाले ऐसे अधिकारी महारानी के संरक्षण में आ गए। जो नहीं आए उनके सरनेम गायब और नाम से बुलाने की परंपरा चलने लगी।

गुटबाजी का ऐसा खेल चला कि चुनिंदे आईएएस और आईपीएस अधिकारी महारानी के तलवे चाटने लगे, इसका फायदा भी मिला, ये सब कमीशन एजेंट बन गए। खूब कमीशन बटोरे। इधर महारानी को पैसे इतने मिल रहे थे कि अंदाजा नहीं था। कभी सूटकेस भरता तो कभी अलमारी तो कभी कमरा। पैसे की असंतुष्टि के साथ गूंजा में एक ख्वाब पल रहा था सामाजिक प्रतिष्ठा सहित राजनैतिक महत्वाकांक्षा का।सूत्रों की माने तो पूर्व मुख्यमंत्री के घर में महारानी का प्रवेश निषेध था। परिवार वाले सख्त रूप से नाराज़ थे। महारानी के लिए घर के दरवाजे बंद हुए तो बदला भांजने के लिए रायपुर का गेट बंद करने का खेल चला।
बहरहाल, बहुत सी बाते होती रही । महारानी में राजनैतिक महत्वाकांक्षा भी जाग रही थी कि बहुत हुई नौकरी, भविष्य में विधायक, मंत्री भी बना जा सकता है। कोरबा पर नजर भी गड़ा ली गई थी लेकिन सारे अरमानों पर केंद्रीय जांच एजेंसी ने पानी फेर दिया। देश और राज्य की सभी जांच एजेंसियों ने ऐसी जांच की महारानी को फिर से गूंजा बन पड़ गया। सत्तारूढ़ पार्टी को गूंज सुनाई देना बंद हो गया। ढाई साल जेल में रह कर राज्य से जमानत में निर्वासित जीवन बेंगलुरु में जी रही थी कि छह माह बाद फिर जांच एजेंसी ने उनको धर लिया। पहले कोयला अब शराब, आगे डीएमएफ। गूंजा जी किसी के घर को तोड़ने की सजा भगवान देता है।
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