Upi Charge: देशभर में अब UPI को लेकर एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है. जिसका ज्यादातर लोग विरोध कर रहे हैं. यह बदलाव 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने जा रहा है. अब 2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ Person-to-Merchant (P2M) UPI पेमेंट पर 0.4 फीसदी MDR लगाया जाएगा. इसके लागू होने के बाद सीधे तौर पर व्यापारियों पर ज्यादा असर पड़ने वाला है. इन सब के बीच अब नीति आयोग के वाइस चेयरमैन अशोक कुमार लाहिड़ी के बयान के बाद बवाल मचा हुआ है.
अशोक कुमार लाहिड़ी ने UPI पर लगने वाले चार्ज का बचाव करते हुए कहा कि सरकार हर चीज पर हमेशा सब्सिडी नहीं दे सकती है. उन्होंने इसे अपनी व्यक्तिगत राय बताया और साफ किया कि यह नीति आयोग का आधिकारिक रुख नहीं है.
उनके मुताबिक कारोबारियों को डिजिटल पेमेंट सिस्टम की लागत में मामूली योगदान देना चाहिए. हर सेवा को सरकारी सब्सिडी के भरोसे नहीं चलाया जा सकता है. उन्होंने यह तक कह दिया कि 40 पैसे देने से मर नहीं जाओगे.
अशोक कुमार लाहिड़ी ने और क्या-क्या कहा?
अशोक कुमार लाहिड़ी ने टैक्स और सरकार के खर्च को लेकर भी अपनी बात रखी. लाहिड़ी ने चाणक्य का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकार को भी उसी तरह संसाधन जुटाने चाहिए, जैसे फूल को नुकसान पहुंचाए बिना मधुमक्खी धीरे-धीरे उसका शहद लेती है. उनका तर्क था कि व्यवस्था को लंबे समय तक चलाने के लिए कारोबार को आत्मनिर्भर बनाना जरूरी है.
क्या होने जा रहे बदलाव
दरअसल, NPCI के नए नियम के मुताबिक 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से ज्यादा के चुनिंदा मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 फीसदी MDR लगेगा. हालांकि इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये रखी गई है. यानी 75,000 रुपये या उससे ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर भी MDR 300 रुपये से अधिक नहीं होगा. खास बात यह है कि व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) UPI ट्रांसफर पर यह शुल्क नहीं लगेगा.
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