CG High Court: नेशनल हाईवे मुआवजा मामले में 221 दिन की देरी पर हाई कोर्ट ने सुनाया फैसला, माफ करने से किया इनकार

CG High Court: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने नेशनल हाईवे चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजे से जुड़े मामले में दायर आर्बिट्रेशन अपील को 221 दिन की देरी के कारण खारिज कर दिया. कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि केवल धनाभाव और कानूनी जानकारी की कमी जैसे सामान्य कारणों के आधार पर इतनी लंबी देरी को माफ नहीं किया जा सकता. मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ में हुई.

क्या है पूरा मामला?
जांजगीर-चांपा जिले के सारागांव निवासी रामकृष्ण, ओंकार, महावीर, परमेश्वरी और रमेश्वरी की जमीन नेशनल हाईवे चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहित की गई थी। 30 जुलाई 2016 को अवार्ड पारित हुआ. मुआवजे की राशि से असंतुष्ट होकर अपीलकर्ताओं ने नेशनल हाईवे एक्ट की धारा 3G(5) के तहत मामला मध्यस्थ के समक्ष रखा. मध्यस्थ ने 10 नवंबर 2017 को आदेश पारित करते हुए मुआवजे का पुनर्मूल्यांकन केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड, रायपुर के वर्ष 2015-16 के दिशा-निर्देशों के अनुसार करने का निर्देश दिया था. इस आदेश के खिलाफ कार्यपालन अभियंता, लोक निर्माण विभाग (राष्ट्रीय राजमार्ग) ने धारा 34 के तहत जिला न्यायालय में चुनौती दी. तृतीय जिला न्यायाधीश, जांजगीर ने 2019 में मध्यस्थ का आदेश निरस्त कर दिया.

221 दिन की देरी से दाखिल हुई अपील
जिला न्यायालय के आदेश के खिलाफ अपीलकर्ताओं ने धारा 37 के तहत हाईकोर्ट में अपील दायर की, लेकिन यह अपील 221 दिन की देरी से दाखिल हुई। देरी माफी के लिए लिमिटेशन एक्ट की धारा 5 के तहत आवेदन पेश किया गया. अपीलकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि धनाभाव, प्रक्रिया की जानकारी का अभाव और व्यक्तिगत परेशानियों के कारण समय-सीमा में अपील दाखिल नहीं हो सकी. उनका कहना था कि देरी जानबूझकर नहीं की गई और यदि देरी माफ कर दी जाए तो प्रतिवादियों को कोई नुकसान नहीं होगा.

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