छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के एफसीआई विभाग के एक अधिकारी के 38 लाख रुपए नगद के चोरी और उसके बाद पुलिस की तत्परता से चोरों के पकड़े जाने और नगदी की बरामदगी की राहत भरी खबर है। रायपुर नगर क्षेत्र में पुलिस कमिश्ननरी स्थापित होने के बाद अपराध नियंत्रण के क्षेत्र में ये घटना मायने रखती है। इसे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा लागू की गई नई योजना के सफ़लता के रूप में भी देखा जाना चाहिए। पुलिस शाबाशी की अधिकारी है।
38 लाख रुपए मिलने का महत्वपूर्ण पक्ष ये है कि आम आदमी सरकारी नियम कानूनों का जानकार न हो ये बात मानी जा सकती है लेकिन सरकारी अधिकारी ही जानकार न हो ये बात गले से नीचे नहीं उतरती है। जिस अधिकारी के कार से 38 लाख रुपए नगद मल्टी पार्किंग के दूसरे तल से चोरी हुए वे रजिस्ट्री कराने आए थे। जमीन खरीदना, हर व्यक्ति का अधिकार है। निजी और सरकारी अधिकारी के जमीन खरीदने में फर्क है। सरकारी अधिकारी को जमीन खरीदने से पहले अपने विभाग से लिखित आवेदन देकर ये बताना होता है कि किस व्यक्ति से कितनी भूमि किस मूल्य पर खरीदा जाना है।
आवश्यक राशि किस प्रकार अर्जित की जाएगी इसका उल्लेख होता है।विभाग बकायदा इसकी लिखित अनुमति देता है। इस बात की जांच अवश्य होना चाहिए कि धमतरी एफसीआई के इस अधिकारी द्वारा विधिक रूप से अनुमति लिया है अथवा नहीं। इसकी जांच होनी चाहिए।यदि अनुमति नहीं ली गई है तो ये मामला गंभीर है।
दूसरा मसला है कि जमीन रजिस्ट्री के लिए सरकार के कायदे कानून लिखित है तय है। पैसे के लेनदेन के लिए भी विधिक तरीके है। बीस हजार रुपए से अधिक की राशि का अंतरण केवल चेक के माध्यम से की जा सकती है। एफसीआई के अधिकारी इस नियम से नावाकिफ थे, ये बात गले से नीचे नहीं उतरती है।
जमीन खरीद बिक्री में सक्रिय दलाल लोग बेची जाने वाली जमीन के मूल्य का साठ प्रतिशत राशि चेक और शेष चालीस फीसदी राशि नगद के रूप में लेते है ये बात भी सामान्य है। इस तर्क को मान ले तो एफसीसी के अधिकारी जिस जमीन की रजिस्ट्री कराने आए थे उसकी कीमत एक करोड़ रुपए के आसपास तय थी। जिसमें रजिस्ट्री के समय दलाल 38 लाख नगद लेते और 60 लाख चेक से भुगतान होता।हो सकता है कि रजिस्ट्री के बाद बैंक से ऋण भी लिया जाता।
क्या इस अधिकारी ने अपने विभाग को इस बात की लिखित जानकारी दी ये जांच का विषय है।एफसीआई के अधिकारी 38 लाख रुपए नगद लेकर आए थे।इतनी बड़ी नगद राशि अधिकारी द्वारा अपने खाते से कब निकाले अथवा किस व्यक्ति से प्राप्त किए इसकी पतासाजी होना चाहिए। सूत्रों की माने तो एफसीआई में भ्रष्ट्राचार की जड़े गहरी हो चुकी है। छत्तीसगढ़ का धमतरी जिला एफसीआई के भ्रष्ट्राचार के मामले बदनाम रहा है।कांग्रेस के शासनकाल में इसी जिले में एफसीआई के अधिकारियों के भ्रष्ट्राचार की लिखित शिकायत छत्तीसगढ़ राइस मिल एसोसिएशन के तत्कालीन कोषाध्यक्ष रोशन चंद्राकर ने तत्कालीन केंद्रीय खाद्य मंत्री पीयूष गोयल को किया था।
पीयूष गोयल तत्काल रायपुर आए और थोक में छत्तीसगढ़ के एफसीआई अधिकारियों को हटा दिया था। भ्रष्ट्राचार का ट्रांसफर नहीं होता भ्रष्टाचार की राशि स्थाई होती है, समय के साथ परिवर्तनशील, चर्चा इस बात की है कि सेंट्रल पूल में राइस मिलो के द्वारा दिए जाने वाले चांवल के ढाई हजार क्विंटल के बदले पैंतालीस हजार रुपए सद्भावना राशि या सुविधा शुल्क ली जाती है।
केंद्र सरकार द्वारा 25 फीसदी कनकी की मात्रा में एक प्रतिशत की बढ़ोतरी का मूल्य बाजार में कनकी और चांवल की अंतर राशि के आधार पर नौ से दस रुपए क्विंटल तय होता है। अगर चोरी हुए और जप्त हुई राशि की प्राप्ति का तरीका ये है तो जांच के बिंदु गम्भीर गड़बड़ी की खुलासा की प्रतीक्षा में है। बताया जा रहा है कि 38 लाख रुपए नगद की शिकायत केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई और एफसीआई को की जा रही है
INDIA WRITERS Voices of India, Words That Matter