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मुस्लिमों के 5% आरक्षण को पूरी तरह खत्म किया गया, महाराष्ट्र सरकार का फैसला

महाराष्ट्र सरकार ने सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े मुस्लिम वर्ग को मिलने वाला 5% आरक्षण पूरी तरह समाप्त कर दिया है। इसके बाद इस श्रेणी के तहत कोई लाभ नहीं मिलेगा, न ही कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश मिलेगा और न ही नए जाति प्रमाणपत्र जारी होंगे।

साल 2014 में राज्य में मुस्लिम समुदाय के पिछड़े वर्ग को विशेष पिछड़ा प्रवर्ग-ए (SBC-A) के तहत 5% आरक्षण दिया गया था। हालांकि यह आरक्षण पहले ही रद्द हो चुका था, लेकिन उससे संबंधित कुछ प्रक्रियाएं और प्रशासनिक आदेश अब तक प्रभावी माने जा रहे थे। सरकार ने अब उन सभी प्रक्रियाओं को भी रद्द कर दिया है।

सरकार के आदेश के मुताबिक, इस श्रेणी के तहत अब कोई नया जाति प्रमाणपत्र या वैधता प्रमाणपत्र जारी नहीं किए जाएंगे। पहले जारी किए गए सभी आदेश और सरकारी सर्कुलर अब अमान्य माने जाएंगे। इसके साथ ही महाराष्ट्र अल्पसंख्यक विभाग के उप सचिव मिलिंद शेनॉय का तबादला भी कर दिया गया है।

इस आरक्षण को जुलाई 2014 में एक अध्यादेश के जरिए लागू किया गया था, लेकिन इसे मुंबई हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी। केवल चार महीने में हाई कोर्ट ने स्थगन आदेश जारी किया और क्योंकि अध्यादेश 23 दिसंबर 2014 तक कानून में परिवर्तित नहीं हुआ, यह अपने आप समाप्त हो गया। सरकार ने अब स्पष्ट किया है कि इस 5% आरक्षण के आधार पर अब कॉलेजों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

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