SC On MP Government: सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के चंबल में बेतहाशा खनन को लेकर चिंता जताई है. कोर्ट ने प्रदेश सरकार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि आप अपनी नाकामी का बहाना नहीं बना सकते. अगर जरूरत पड़ी तो पैरामिलिट्री फोर्स तैनात करेंगे. इसके साथ ही अवैध खनन वाले मार्गों पर हाई-रिजॉल्यूशन वाई-फाई सक्षम सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्देश दिया है. अगली सुनवाई 11 मई को होगी. कोर्ट ने एमपी सरकार को अवैध खनन करने वालों के खिलाफ ठोक कदम उठाने की बात कही है.
सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान चौंकाने वाली बात बताई. कोर्ट के मुताबिक, राज्य सरकार ने नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में कहा कि उसके वन अधिकारी रेत माफिया के मुकाबले के लिए पर्याप्त हथियारों से लैस नहीं है, जबकि माफिया के पास आधुनिक हथियार और वाहन हैं. यह सुनते ही कोर्ट ने फटकार लगाई और कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो पैरामिलिट्री फोर्स तैनात करेंगे.
राज्य अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए गंभीर नहीं
सुप्रीम कोर्ट में यह टिप्पणी न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने की है. कोर्ट ने कहा कि इस तरह की दलील न केवल प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाती है कि राज्य अवैध गतिविधियों को रोकने के प्रति गंभीर नहीं है. ऐसी कमियां सीधे तौर पर गैरकानूनी खनन, हिंसा, मानव जीवन के नुकसान और दुर्लभ वन्यजीवों के आवास के विनाश को बढ़ावा देती हैं.
5400 वर्ग किलोमीटर में फैला है राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य
बता दें, राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य लगभग 5400 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है, जहां घड़ियाल, लाल मुकुट कछुआ और गंगा डॉल्फिन जैसी संकटग्रस्त प्रजातियां पाई जाती हैं. यह अभयारण्य राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा पर चंबल नदी के किनारे स्थित है. अब देखना यह होगा कि सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद एमपी सरकार क्या एक्शन लेती है
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