Harnek Singh deported from US : एक दशक से अधिक समय से कानून की नजरों से बचकर भाग रहा साइबर ठगी का मुख्य सरगना हरनेक सिंह आखिरकार गिरफ्तार हो ही गया। सिंगापुर में रह रहे भारतीय मूल के नागरिकों को डरा-धमकाकर ठगी का शिकार बनाने वाला यह आरोपी अमेरिका में अवैध रूप से छिपा हुआ था। CBI की ओर से जारी कराए गए इंटरपोल रेड नोटिस और लुक आउट सर्कुलर (LOC) के प्रभाव से अमेरिकी अधिकारियों ने उसे डिपोर्ट कर भारत भेज दिया, 9 सितंबर को जैसे ही उसका विमान दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरा, पहले से अलर्ट CBI की विशेष टीम ने उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद आरोपी को पंचकूला स्थित CBI की विशेष कोर्ट में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश दिए।
इमिग्रेशन ऑफिसर बन फैलाया था खौफ
इस पूरे फर्जीवाड़े का खेल साल 2013 में शुरू हुआ था, जब भारत में बैठे साइबर अपराधियों के एक गिरोह ने सिंगापुर में रह रहे भारतीयों को अपना शिकार बनाना शुरू किया। गिरोह के सदस्य खुद को ‘सिंगापुर इमिग्रेशन डिपार्टमेंट’ का आला अफसर बताकर स्पूफ कॉल करते थे। पीड़ितों को मानसिक रूप से डराने के लिए वे यह दावा करते थे कि उन्होंने एयरपोर्ट पर भरे गए डिसएम्बार्केशन फॉर्म में गलत जानकारियां दी हैं। इसके कारण उनके खिलाफ लीगल एक्शन और देश से बाहर निकालने (डिपोर्ट) की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है।
कार्रवाई के इसी डर का फायदा उठाकर गिरोह पेनल्टी और केस खत्म करने की फीस के नाम पर वेस्टर्न यूनियन मनी ट्रांसफर के जरिए मोटी रकम भारत मंगवाता था। जांच में इस बात का खुलासा हुआ कि ऐंठी गई सारी रकम हरनेक सिंह के स्वामित्व वाले मनी ट्रांसफर केंद्र से ही निकाली जाती थी।
सह-आरोपियों को मिल चुकी सजा, मास्टरमाइंड 2013 में ही हुआ था रफूचक्कर
इस हाई-प्रोफाइल केस में हरनेक के साथ आदित्य भारद्वाज और दीपक जैन भी शामिल थे। मामला दर्ज होते ही मई 2013 में हरनेक भारत छोड़कर अमेरिका भाग निकला। CBI ने वर्ष 2016 में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धोखाधड़ी, फर्जीवाड़े, आपराधिक साजिश और IT एक्ट की धाराओं में एफआईआर दर्ज की। पंचकूला कोर्ट में केस का ट्रायल चला, जिसमें 26 मई 2025 को अदालत ने सह-आरोपी आदित्य और दीपक को दोषी करार दे दिया।
समन की अनदेखी पड़ी भारी, ऐसे कसा गया शिकंजा
अमेरिका में रहते हुए भी जब भारतीय अदालत के समन और जमानती वारंट का हरनेक पर कोई असर नहीं हुआ, तो 22 अप्रैल 2024 को विशेष अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया। CBI ने त्वरित अंतरराष्ट्रीय तालमेल बिठाते हुए इंटरपोल के माध्यम से ‘रेड नोटिस’ जारी करवाया और उसके पासपोर्ट पर LOC दर्ज कराई। इसी मजबूत कानूनी घेराबंदी के चलते आरोपी अमेरिका से डिपोर्ट होकर भारतीय एजेंसियों की गिरफ्त में आ गया।
INDIA WRITERS Voices of India, Words That Matter