रायपुर। घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने वाली मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान (एम-ऊर्जा) योजना की पात्रता अवधि पांच महीने बढ़ाकर 31 मार्च 2027 तक कर दी गई है। इससे करीब 7.25 लाख घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को योजना के तहत रियायत का लाभ मिलता रहेगा। सरकार ने 200 यूनिट तक बिजली बिल में दी जा रही छूट को भी पूर्ववत जारी रखने का निर्णय लिया है।
योजना की पात्रता अवधि पहले 30 सितंबर 2026 तक निर्धारित थी। अब इसे बढ़ाकर 31 मार्च 2027 कर दिया गया है। इस फैसले से पात्र उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत जरूर मिलेगी, लेकिन योजना की अवधि बढ़ाने के फैसले के साथ यह सवाल भी उठता है कि बिजली बिल में राहत को लेकर सरकार की दीर्घकालिक नीति क्या है।
योजना के तहत 400 यूनिट तक मासिक बिजली खपत वाले उपभोक्ताओं के लिए निर्धारित पात्रता अवधि बढ़ाई गई है, जबकि 200 यूनिट तक बिजली बिल में रियायत जारी रहेगी। सरकार के इस निर्णय से लाखों घरेलू उपभोक्ताओं को तत्काल राहत मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, अवधि विस्तार के साथ यह स्पष्ट होना बाकी है कि भविष्य में इस योजना को किस रूप में जारी रखा जाएगा और पात्रता से जुड़े नियमों में आगे कोई बदलाव होगा या नहीं। उपभोक्ताओं के लिए जरूरी है कि सरकार योजना की निरंतरता और बिजली बिल में राहत को लेकर स्पष्ट एवं दीर्घकालिक स्थिति सामने रखे।

अफसरों का प्लान फेल
हॉफ बिजली योजना को ऊर्जा विभाग के अफसरों ने यह कहकर बंद कराया था कि पीएम सूर्य घर योजना में लोगों इसके कारण नहीं लगवा रहे हैं। विद्युत कंपनी के निदेशक मंडल के अध्यक्ष सुबोध सिंह और अन्य अफसरों ने इसकी वकालत की। बिजली बिल के मुद्दे पर राज्य भर के बिजली उपभोक्ता आक्रोशित हैं। वे कटौती और स्मार्ट मीटर के तेज भागती सुई से परेशान हो गए है। सूर्य घर योजना को अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई। बताया जाता है कि छत्तीसगढ़ में 65 लाख बिजली उपभोक्ता है। सरकारी प्रयास निरंक है। अपने स्तर पर केवल 1.5 लाख उपभोक्ताओं ने सोलर लगाया है। आंकड़े बता रहे है कि प्रधानमंत्री ऊर्जा योजना में पतीली लगाने की सफल कोशिश हो रही है। बिजली विभाग ने अपने कर्मचारियों के लिए सोलर अनिवार्य किया है लेकिन दिया तले अंधेरा है
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