भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी नए राजनीतिक दल या सामाजिक आंदोलन की विश्वसनीयता उसकी वित्तीय शुचिता और पारदर्शी संसाधनों पर टिकी होती है। जब भी किसी संगठन के विरोध प्रदर्शनों और अभियानों के पीछे सीमा पार या विदेशी ताकतों के वित्तीय तार जुड़ने की बातें उठती हैं, तो यह सीधे तौर पर देश की आंतरिक सुरक्षा का मसला बन जाता है।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और उससे जुड़े चेहरे पिछले कुछ समय से अपने आक्रामक तेवरों को लेकर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। मगर अब केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह द्वारा सीधे तौर पर अमेरिका, पाकिस्तान और तथाकथित ‘डीप स्टेट’ से आर्थिक मदद मिलने के गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद इस पूरे मामले ने एक बड़ा सियासी और राष्ट्रीय मोड़ ले लिया है। जुबानी जंग से आगे बढ़ते हुए अब इस विवाद में पुलिस की एंट्री हो चुकी है, जिसके बाद फंडिंग के पूरे नेटवर्क की जवाबदेही तय करने की कवायद शुरू हो गई है।
दिल्ली क्राइम ब्रांच की कार्रवाई, पूछताछ के लिए पेश हुए सौरव दास और आशुतोष रांका
विदेशी फंडिंग के आरोपों के तूल पकड़ने के बाद दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस मामले में सक्रिय कार्रवाई शुरू कर दी है। क्राइम ब्रांच ने सीजेपी के सह-संस्थापक आशुतोष रांका और सौरव दास को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए तलब किया। समन मिलने के बाद आज आशुतोष रांका और सौरव दास दोनों ही क्राइम ब्रांच के दफ्तर पहुंचे, जहां जांच अधिकारी उनके वित्तीय लेन-देन, अभियानों के लिए मिलने वाले फंड और अन्य गतिविधियों को लेकर गहन पूछताछ कर रहे हैं।
जितेंद्र सिंह का बड़ा दावा: अमेरिका और पाकिस्तान से आ रहे पैसे
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बेंगलुरु में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान CJP नेताओं पर विदेशी फंडिंग के जरिए देश विरोधी अभियान चलाने का सीधा आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को अमेरिका में बैठे चुनिंदा डोनर्स से वित्तीय सहायता मिल रही है, जबकि सह-संस्थापक आशुतोष रांका को पाकिस्तानी नेताओं और उनके कथित हैंडलर्स से फंड ट्रांसफर किए जा रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि इस अनधिकृत विदेशी धन का इस्तेमाल भारत में सरकार के खिलाफ माहौल तैयार करने और जनता के बीच भ्रामक नैरेटिव फैलाने के लिए किया जा रहा है।
‘डीप स्टेट’ और विदेशी NGO की साजिश का आरोप
जितेंद्र सिंह ने अपने संबोधन में यह भी रेखांकित किया कि देश के भीतर और बाहर सक्रिय भारत विरोधी ताकतें, विदेशी एनजीओ और ‘डीप स्टेट’ के ऑपरेटिव्स मिलकर एक सुनियोजित साजिश रच रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में अशांति फैलाने और प्रदर्शनों को हवा देने के लिए जुटाए जा रहे संसाधनों की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। केंद्रीय मंत्री ने विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) का कड़ा बचाव करते हुए कहा कि विदेशी फंडिंग के गलत रास्तों और देश की संप्रभुता पर चोट करने वाले तत्वों को रोकने के लिए इस कानून की सख्त जरूरत है।
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