रायपुर। दीपावली से पहले छत्तीसगढ़ के बुनकरों और महिला स्व-सहायता समूहों के लिए राज्य सरकार ने राहत भरा कदम उठाया है। बुनाई और गणवेश सिलाई के काम से जुड़े हितग्राहियों को उनके श्रम का पारिश्रमिक जारी किया गया है। इसके तहत कुल 9 करोड़ 41 लाख रुपये की राशि आरटीजीएस के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी गई है। समय पर भुगतान मिलने से हजारों परिवारों को त्योहार से पहले आर्थिक राहत मिली है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशा और ग्रामोद्योग मंत्री गजेन्द्र यादव के निर्देश पर यह भुगतान किया गया है। मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि बुनकरों और महिला स्व-सहायता समूहों के परिश्रम का समय पर भुगतान करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर बुनकरों और महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। मंत्री ने कहा कि सरकार ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना के अनुरूप बुनाई और गणवेश सिलाई के माध्यम से लोगों को रोजगार से जोड़ रही है। महिलाओं के कौशल विकास और स्वरोजगार का दायरा बढ़ाकर उनकी आय में वृद्धि करना सरकार का प्रमुख उद्देश्य है।
26 जिलों की 302 बुनकर समितियों को मिला भुगतान
ग्रामोद्योग विभाग के सचिव सह प्रबंध संचालक राजेश सिंह राणा के अनुसार, अक्टूबर 2026 में प्रदेश के 26 जिलों की 302 बुनकर सहकारी समितियों को 7 करोड़ 60 लाख रुपये का भुगतान किया गया। इसके अलावा 3 नवंबर को 49 बुनकर सहकारी समितियों को 1 करोड़ 50 लाख रुपये और 128 महिला स्व-सहायता समूहों को 31 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि जारी की गई।
चालू वित्तीय वर्ष में 76 करोड़ से अधिक का भुगतान
राज्य हाथकरघा संघ द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 में 3 नवंबर तक कुल 76 करोड़ 13 लाख 54 हजार रुपये सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में अंतरित किए जा चुके हैं। इसमें 345 बुनकर सहकारी समितियों को बुनाई पारिश्रमिक के रूप में 54 करोड़ 87 लाख रुपये और 2005 महिला स्व-सहायता समूहों को सिलाई कार्य के लिए 21 करोड़ 17 लाख रुपये दिए गए हैं।
बुनकरों के परिवारों को आर्थिक सहायता
हाथकरघा क्षेत्र से जुड़े परिवारों के कल्याण के लिए भी सहायता प्रदान की गई है। बुनकरों की आकस्मिक मृत्यु होने पर उनके 29 आश्रित परिवारों को 5 लाख 80 हजार रुपये का अनुदान दिया गया है। वहीं, हाथकरघा क्षेत्र के 11 पुरस्कृत हितग्राहियों को 3 लाख 74 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है।
पुनर्वासित महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई से मिलेगा रोजगार
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सुकमा, बस्तर, कोरबा और जशपुर जिले की 30 पुनर्वासित महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई का विशेष प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। इसके लिए राज्य हाथकरघा संघ के अनुपयोगी और कटपीस कपड़ों का इस्तेमाल कर खिलौने, बैग और वाटर बैग जैसे उपयोगी उत्पाद तैयार करवाए जाएंगे।
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