खाद्य संचालनालय और प्रतिपूर्ति का खेल

कांग्रेस शासनकाल में हुए ढाई अरब के राशन बचत घोटाले में बनी विधान सभा कमेटी की निर्णायक बैठकों के बाद नतीजे का समय आने वाला है।खाद्य मंत्रालय की बदनामी न हो करके पदोन्नत होकर खाद्य संचालनालय से आए अधिकारी का डिमोशन कर वापस भेज दिया गया है। बताया जाता है कि खाद्य मंत्रालय की सचिव को सच्चाई पता चल चुकी थी कि घोटाले का मास्टर माइंड अधिकारी कौन है।

खाद्य मंत्रालय को इस बात की पुख्ता जानकारी मिली है कि अरबों के राशन घोटाले को दबाने के लिए इस अधिकारी ने नियमों का सत्यानाश कर दिया है। बताया जाता है कि घोटाले को दबाने के लिए खाद्य मंत्रालय के मार्फत विधान सभा में गलत जानकारी परोसी गई।

तेरह हजार राशन दुकानों में से आठ हजार राशन दुकानों को नोटिस जारी किया जाना बताया गया। प्रदेश के अधिकांश अनुविभागीय अधिकारी राजस्व ने जानकारी दिया है कि पिछले पांच साल मे बमुश्किल पंद्रह से बीस राशन दुकानों को नोटिस जारी हुआ है। प्रदेश की अस्सी फीसदी राशन दुकानों का नियंत्रण अनुविभागीय अधिकारी राजस्व के पास है। यदि उनके द्वारा नोटिस जारी नहीं किया गया तो विधान सभा में जादुई आंकड़ा कहां से लाया गया।ये जांच का विषय है।खाद्य सचिव तक अनुविभागीय अधिकारी राजस्व द्वारा दी गई वास्तविक जानकारी प्रेषित की गई है। अनेक जिलों के खाद्य अधिकारियों ने बताया कि उनके द्वारा थोक में जारी किए गए नोटिस संख्या की जानकारी नहीं है।

खाद्य संचालनालय के अधिकारी का दूसरा सबसे बड़ा काम घोटाले को दबाने के लिए राशन दुकान दारो पर तीन तरीके से दबाव डाला गया

  1. कमीशन राशि की अवैध कटौती राशन दुकानदारो की कमीशन राशि पर डाका डाला गया। जिन राशन दुकानदारो ने घोटाला किया उनके कमीशन की राशि, जो सरकार से मिली थी उसे दबाव डाल कर प्रतिपूर्ति का नाम दे दिया गया।
  2. आर आर सी वसूली
    राशन दुकानदारों ने जिस मात्रा का चांवल शक्कर की कालाबाजारी किया इसकी कमीशन काटने से भी भरपाई नहीं हो सकी तो पांच हजार राशन दुकानों को आर आर सी की नोटिस जारी करवा दी गई जबकि न तो खाद्य अधिकारी और न ही अनुविभागीय अधिकारी राजस्व ने प्रकरण में अंतिम आदेश जारी किया है
  3. बाजार से घटिया चांवल शक्कर खरीदी कमीशन और आर आर सी जारी होने के बाद भी घोटाले की पूर्ति नहीं हुई तो खुले बाजार से घटिया चांवल शक्कर खरीद कर रखवाया गया है। बिरगांव में एक राशन दुकानदार ने साढ़े सात सौ क्विंटल चांवल की पहले कालाबाजारी की गई और सालों बाद एक राइस मिलर्स से चांवल खरीद कर रख भी दिया।खाद्य विभाग के निरीक्षकों का कहना है कि बाजार से चांवल शक्कर खरीद कर रखवाने का निर्णय संचालनालय के एक अधिकारी का है जिसने जूम बैठक लेकर इस प्रकार का अवैध कार्य करवाया है।

एक समाजसेवी संस्था ने घोटाले का पूरा चिट्ठा राष्ट्रपति, प्रधान मंत्री, खाद्य मंत्री को भेज कर सीबीआई जांच की मांग की है।ये भी जानकारी मिली है कि खाद्य संचालनालय के अधिकारी के निर्देश पर खाद्य अधिकारियों के मॉड्यूल में बाजार से चांवल (सामान्य और फोर्टीफाइड) और शक्कर खरीदी की एंट्री करने का प्रावधान रखने वाले इन आई सी के मुख्य अधिकारी ने डर के कारण इस्तीफा दे दिया है।

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