गोवा. गोवा की राजनीति में आम आदमी पार्टी ने एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। जिला पंचायत चुनावों के लिए पार्टी अब तक 22 उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है और साफ कह दिया है कि इस बार वह सभी 50 सीटों पर पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ेगी। यह ऐलान सिर्फ नामों की सूची भर नहीं है, बल्कि यह उस नई राजनीतिक दिशा का संकेत है जिसमें AAP गोवा के गांवों, कस्बों और स्थानीय निकायों को सक्रिय और मजबूत बनाना चाहती है।
यह कदम यह भी दिखाता है कि पार्टी ने गोवा में अपनी संगठनात्मक पकड़ को पिछले कुछ वर्षों में न सिर्फ बढ़ाया है, बल्कि उसे चुनाव जीतने की क्षमता वाली ठोस संरचना में बदल दिया है।
AAP की यह सूची साफ-सुथरी राजनीति, पारदर्शिता और जनसेवा पर आधारित उसकी पहचान को दोहराती है। जिन चेहरों को टिकट दिया गया है, उनमें युवाओं, महिलाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अलग-अलग समुदायों के प्रतिनिधियों का संतुलित और समावेशी मिश्रण है। यह वही मॉडल है जिसके चलते दिल्ली और पंजाब में पार्टी पंचायतों से लेकर सरकार तक बदलाव का प्रतीक बनी। अब यही ऊर्जा गोवा में भी दिखाई देने लगी है। गांवों में पानी, सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और पारदर्शी प्रशासन की मांग को लेकर जनता जिस पार्टी की तरफ देख रही थी, यह घोषणा उसी भरोसे की पुष्टि करती है।
इसके विपरीत, गोवा में बीजेपी सरकार पर जनता की नाराज़गी बढ़ती दिख रही है। विकास के दावे सोशल मीडिया और पोस्टरों तक सीमित हैं, जबकि जमीनी स्तर पर पंचायतों की शक्तियों को लगातार कमजोर किया गया है। ग्रामीण इलाकों में महंगाई, रोजगार की कमी और भ्रष्टाचार के मुद्दे लगातार उठ रहे हैं, लेकिन सरकार की प्राथमिकता केवल राजनीतिक प्रचार और बड़े-बड़े वादों में नज़र आती है। ऐसे माहौल में आम आदमी पार्टी का यह आक्रामक प्रवेश बीजेपी के लिए सीधी चुनौती है।
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