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Bengal Elections 2026: ECI ने जारी की दूसरी सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट, असमंजस की स्थिति बनी हुई हैं

बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) की दूसरी पूरक सूची शुक्रवार देर रात चुनाव आयोग ने जारी कर दी। लेकिन इसमें शामिल और हटाए गए नामों का कोई डेटा साझा नहीं किया गया. आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर दूसरी सूची का लिंक दे दिया गया है, जहां जाकर ‘विचाराधीन’ श्रेणी वाले लोग अपनी वर्तमान स्थिति का पता कर सकते हैं। हालांकि अंतिम मतदाता सूची से कटे व उसमें जुड़े कुल नामों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कारण, पहली सूची की तरह ही दूसरी सूची को लेकर भी आयोग की तरफ से कोई प्रेस नोट जारी नहीं किया गया है.

बंगाल में चुनाव आयोग ने SIR के तहत दूसरी सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट जारी कर दी है, लेकिन इसमें शामिल और हटाए गए नामों का कोई डेटा साझा नहीं किया गया. वेबसाइट पर लिस्ट अपलोड होने के बावजूद तकनीकी गड़बड़ी के कारण आंकड़े एक्सेस नहीं हो पाए. इससे पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा. चुनाव आयोग ने शुक्रवार रात स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी SIR के तहत दूसरी सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी कर दी, लेकिन इसमें कितने नाम जोड़े गए और कितने हटाए गए, इस पर आयोग ने पूरी तरह चुप्पी साध ली है, इसलिए इस बार भी पता नहीं चल पा रहा है कि अब तक कुल कितने विचाराधीना मामलों का निपटारा हुआ है और उनमें से कितनों के नाम कटे व जुड़े हैं।

बूथवार लिस्ट 27 मार्च की रात करीब 11:30 बजे EC की वेबसाइट पर डाली गई, लेकिन जो पेज नाम जोड़ने या हटाने की जानकारी देते हैं वे “तकनीकी खराबी” के चलते खुल ही नहीं सके. आयोग के एक अधिकारी ने सिर्फ इतना कहा कि दूसरी लिस्ट प्रकाशित हो गई है, इससे ज्यादा कुछ नहीं बताया जा सकता.

बंगाल की 294 विधानसभा सीटों पर 23 और 29 अप्रैल को मतदान होना है और 4 मई को काउंटिंग होगी. ऐसे में लाखों वोटरों का भविष्य अभी भी अधर में है और आयोग की चुप्पी उनकी बेचैनी और बढ़ा रही है.

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की गणना प्रक्रिया के बाद राज्य में कुल 58 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए. इसकी वजह मृत्यु, पलायन, डुप्लीकेट एंट्री और गायब पते बताए गए. इससे बंगाल के कुल मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 7.08 करोड़ रह गई. इससे पहले सोमवार को जारी पहली सप्लीमेंट्री लिस्ट पर भी आयोग ने कितने नाम हटाए और कितने मामले निपटाए गए इसका कोई आंकड़ा नहीं दिया था, जिसकी चारों तरफ से आलोचना हुई थी.

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