कांग्रेस का इतिहास आजादी के वक्त से ही जेल यात्रा का रहा है। सच्चे कांग्रेसी तो स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे ही है। इन गेहूं के साथ उस दौर के कुछ असामाजिक तत्व भी जो आजादी के लड़ाई के बजाय विधि के द्वारा स्थापित अपराध के आरोप में जेल दाखिल हुए थे वे भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बन गए।उनकी कई पीढी फ्रीडम फाइटर का लाभ उठा कर मुफ्त की आजादी का जश्न मना रहे है।
ये साल आजादी का 78वां साल हैं। अगले महीने की 15 अगस्त को देश भर में जश्न मनेगा। इस दिन सभी जेल में मिठाई बाटी जाती है।रायपुर के सेंट्रल जेल में भी बंटेगी। आबकारी घोटाले के पुराने आरोपी दूसरे साल मिठाई खायेंगे। इस घोटाले के नए आरोपी भी है जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र भी है, बिलासपुर के चार्टड एकाउंटेंट भाइयों सहित एक अन्य व्यक्ति के मिलाकर चार नए बंदी है।फिलहाल तो विधि अनुसार 14दिन के लिए जेल दाखिल किया गया है परंतु अगली आजादी का दिवस नसीब जरूर होगा।
छत्तीसगढ़ की कांग्रेस पार्टी में बहुत ही विरले परिवार वाले होंगे जिनके पिता , स्वयं और पुत्र भी याने तीन पीढ़ी आजादी की लड़ाई को छोड़ कर दीगर मामलों में आरोपी बन कर जेल यात्रा(पर्यटन स्थल) किए हुए हो। पिता जी , जातिगत विरोध के चलते जेल कार्यालय तक पहुंचे थे,जमानत मिल गई थी। इनके पुत्र कथित सीडी कांड में जमानती मामले में जमानत न लेने की वजह से जेल यात्रा किए थे।अब इनके पुत्र को ईडी ने शराब घोटाले में 16.70 करोड़ रुपए का अवैध लाभ पाने और एक हजार करोड़ रु को इधर उधर करने के आरोप में जेल दाखिल कर दिया है। इसे आर्थिक नाकाबंदी कहा जा सकता है।
जाहिर है कांग्रेस विपक्ष में है इस कारण जेल में अपेक्षित सुविधा नहीं मिलेगी। कांग्रेस शासनकाल में एक भद्र महिला को एयर कंडीशन, इटेलियन कमोड, वाई फाई, लैपटॉप सहित मनचाहा भोजन सुविधा उपलब्ध थी ही अन्य आईएएस, बिचौलिया भी पिकनिक मना रहे थे। अब मोटी रोटी, पनियल दाल,सब्जी, राशन का मोटा चांवल, चाशनी चाय, गुड चना, मिलेगा। सुबह पांच बजे उठकर भारतीय खुड्डी में शौच करना होगा।
वैसे रायपुर की सेंट्रल जेल थोड़ा कम सुरक्षित है। थोड़े दिनों पहले पूर्व मुख्यमंत्री के पूजा पाठ प्रभारी के करीबी पर घातक हमला हुआ है।सुरक्षा की दृष्टि से बेटे को अन्यत्र जेल ट्रांसफर करना चाहिए। मेरे से भी एक जमाने में सरकार को खतरा महसूस हुआ था और बिलासपुर भेजा गया था।मेरे को जेल भीतर कोई खतरा नहीं था, सरकार डरी हुई थी।अब खतरे को समझना जेल प्रशासन का काम है।
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