Bhopal News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल साइबर ठगों के लिए आसान शिकार बनती जा रही है. बीते महज 30 घंटों के भीतर शहर के 12 थानों में 34 साइबर फ्रॉड की एफआईआर दर्ज की गई हैं. इन मामलों में ठगों ने अलग-अलग तरीकों से शहरवासियों से करीब 1 करोड़ 53 लाख 76 हजार 531 रुपये की ठगी कर ली.
हर बार नए तरीके से ठग लोगों बना रहे अपना शिकार
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, ठगी के तरीके लगातार बदल रहे हैं और ठग लोगों की लालच, डर और मजबूरी को हथियार बना रहे हैं. कभी व्हाट्सएप ग्रुप फॉलो कर कमाई का झांसा दिया जा रहा है, तो कहीं नौकरी, ट्रेडिंग और सरकारी विभाग के नाम पर लोगों को फंसाया जा रहा है.
भोपाल के इन इलाकों से आए बड़े मामले
- साकेत नगर में रहने वाले राजेश से 50 लाख 98 हजार रुपये की ठगी की गई.
- ठगों ने व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए निवेश और मुनाफे का लालच दिया और धीरे-धीरे बड़ी रकम ट्रांसफर करवा ली.
- कमला नगर थाना क्षेत्र में विदेशी ट्रेडिंग के नाम पर एक व्यक्ति से 23 लाख रुपये ठग लिए गए.
- हबीबगंज थाना क्षेत्र में नौकरी दिलाने के नाम पर 15 लाख रुपये की साइबर ठगी सामने आई.
- पिपलानी थाना क्षेत्र में एक महिला से 12 लाख 25 हजार रुपये की रकम ऑनलाइन हड़प ली गई.
- बागसेवनिया इलाके में ठगों ने बिजली कनेक्शन काटने की धमकी दी, मोबाइल में एक एप डाउनलोड करवाया और खाते से 12 लाख रुपये उड़ा लिए.
लोग कैसे फंस रहे हैं?
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि ठग सोशल मीडिया, व्हाट्सएप कॉल, फर्जी कस्टमर केयर नंबर और मोबाइल एप के जरिए संपर्क करते हैं. पहले भरोसा जीतते हैं, फिर लिंक क्लिक करवाकर या एप डाउनलोड कराकर मोबाइल और बैंक अकाउंट तक पहुंच बना लेते हैं. कई मामलों में पीड़ितों को तब तक ठगी का अहसास नहीं होता, जब तक खाते से बड़ी रकम निकल नहीं जाती.
पुलिस ने लोगों से क्या अपील की?
- भोपाल पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि अनजान व्हाट्सएप ग्रुप, लिंक या एप से दूर रहें.
- निवेश, नौकरी या इनाम के नाम पर आए कॉल पर भरोसा न करें.
- कोई भी सरकारी विभाग फोन पर एप डाउनलोड नहीं करवाता.
- साइबर ठगी की आशंका होते ही 1930 हेल्पलाइन या नजदीकी थाने में तुरंत शिकायत दर्ज कराएं.
साइबर सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
लगातार सामने आ रहे मामलों ने राजधानी की साइबर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. आंकड़े बताते हैं कि भोपाल इस समय साइबर अपराधियों के निशाने पर है और जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव साबित हो सकती है.
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