CG High Court: आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के चयन पर विवाद, हाई कोर्ट ने रिट अपील की खारिज, नियुक्ति बहाल

CG High Court: हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता चयन विवाद से जुड़े मामले में दायर रिट अपील को खारिज कर दिया. मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने सिंगल बेंच के आदेश को सही ठहराते हुए कहा कि चयन प्रक्रिया में कोई अवैधता या मनमानी साबित नहीं हुई है.

क्या है पूरा मामला?

  • ये पूरा मामला केवंतरा-1, तहसील मस्तूरी, जिला बिलासपुर के आंगनबाड़ी केंद्र से जुड़ा है.
  • यहां आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पद पर नियुक्ति को लेकर विवाद हुआ था.
  • अपीलकर्ता अमृता पाटले वर्ष 2007 से आंगनबाड़ी सहायिका के रूप में कार्यरत थीं. उनका दावा था कि 10 वर्ष की सेवा पूर्ण करने के बाद उन्हें पदोन्नति का अधिकार था.
  • साल 2016 में कार्यकर्ता पद के लिए विज्ञापन जारी होने पर उन्होंने भी आवेदन किया, लेकिन चयन सूची में कोमल पाटले को अधिक अंक मिलने पर उन्हें नियुक्त कर दिया गया.

बीपीएल अंक को लेकर विवाद
प्रारंभिक चयन सूची में कोमल पाटले को बीपीएल श्रेणी के 6 अंक नहीं मिले थे क्योंकि आवेदन पत्र में संबंधित कॉलम रिक्त रह गया था. बाद में आपत्ति आमंत्रण चरण में उन्होंने बीपीएल कार्ड प्रस्तुत किया. सक्षम प्राधिकारी ने दस्तावेज का सत्यापन कर अंतिम सूची जारी करने से पहले 6 अंक जोड़ दिए. अंतिम मेरिट सूची में कोमल पाटले को 55.84 अंक मिले और वे प्रथम स्थान पर रहीं, जबकि अमृता पाटले को 53.08 अंक मिले और वे चौथे स्थान पर रही.

कलेक्टर और अपर आयुक्त का फैसला
कलेक्टर ने अपील खारिज करते हुए कहा कि बीपीएल दस्तावेज समयसीमा के भीतर प्रस्तुत किया गया था और चयन प्रक्रिया में कोई त्रुटि नहीं थी। हालांकि अपर आयुक्त ने कलेक्टर के आदेश को निरस्त कर अमृता पाटले के पक्ष में निर्णय दिया। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा.

हाई कोर्ट ने सुनाया फैसला
सिंगल बेंच ने पाया कि बीपीएल प्रमाण पत्र अंतिम चयन सूची से पहले प्रस्तुत किया गया था और नियमों के अनुरूप अंक दिए गए थे. इसलिए कलेक्टर का आदेश सही था और अपर आयुक्त ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर हस्तक्षेप किया. डिवीजन बेंच ने भी यही माना कि चयन प्रक्रिया में न तो कोई विधिक त्रुटि हुई और न ही किसी प्रकार की दुर्भावना (मलाफाइड) सिद्ध हुई. न्यायालय ने कहा कि चयन मामलों में तभी हस्तक्षेप किया जाता है जब स्पष्ट अवैधता या नियमों का उल्लंघन हो.

अदालत ने सिंगल बेंच के आदेश को बरकरार रखते हुए कोमल पाटले की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पद पर पुनर्बहाली (बिना बैक वेजेस) के निर्देश को उचित और न्यायसंगत बताया. इन तथ्यों के आधार पर डिवीजन बेंच ने अमृता पाटले की रिट अपील को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया. कोर्ट ने लागत को लेकर कोई आदेश पारित नहीं किया.

Check Also

Ambikapur: महापौर मंजूषा भगत का बेतुका बयान, बोलीं- पीलिया की बीमारी में साजिश की बू, एक ही इलाके में कैसे फैला रोग?

Ambikapur: अंबिकापुर नगर निगम की महापौर मंजूषा भगत ने अंबिकापुर नगर निगम क्षेत्र के नवागढ़ …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *