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भये प्रकट गोपाला: जेल दरवाजे के बाहर रहेंगे अधिकारी

आबकारी घोटाले में लिप्त आबकारी अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट से सशर्त जमानत मिल गई है।इसी घोटाले में पूर्व आबकारी मंत्री,पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र सहित अनेक उच्च स्तरीय अधिकारियों को नियमित जमानत नहीं मिली। बिट्टू भैया सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए थे,कोर्ट ने कहा कि जाओ तय शुदा नियम के तहत आओ। कवासी लखमा जेल में काफी दिनों से डेरा डाले है।पूर्व शराबी मंत्री सॉरी पूर्व शराब मंत्री को जेल में शराब नसीब नहीं हो रही है। जेल में जरूर सोचते होंगे बत्तीस सौ करोड़ के घोटाले में तीन फीसदी कमीशन पाकर सत्यानाश हो गया। हो सकता है जेल से इनपुट देकर हजारों करोड़ का इधर उधर करने वालो के काम धाम को बता रहे हो, चलो मुद्दे पर वापस लौटे।

लोअर और हाई कोर्ट से खारिज लौटे आबकारी अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है। बच गए, यूं कहा जा सकता है कि चालान पेश होने के समय कोर्ट न जाकर भला कर लिए खुद का। अब विभाग में दम लगा सकते है बहाली के लिए! सरकार के पास बहाना भी है अधिकारियों की कमी है।एक पंथ दो काज। घोटाले की राशि का उपयोग हो जाएगा। नया नया विभाग पाए मंत्री जी का सेवा सत्कार हो जाएगा।सौजन्य से सभी सुखी रहते है।

सुप्रीम कोर्ट ने सशर्त जमानत दिया है। आदेश में ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करना है, बॉन्ड भरना है इसके बाद “अस्थाई” जमानत मिलेगी। कहने का मतलब ये है कि तलवार लटकी रहेगी।किसी और जांच एजेंसी ने एंट्री मारी तो फिर से तीन कोर्ट तक चक्कर लगाना पड़ेगा। वैसे आबकारी अधिकारियों का ये झुंड आबकारी घोटाले में अरबों रुपए अंदर कर चुका है। इनकी क़ुबत कपिल सिब्बल को हायर करने की है। बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने ये तो संदेश जरूर दिया है कि अधिकारियों पर राजनीतिज्ञों का अनुचित दबाव जरूर था। भले कमाए है लेकिन प्रसाद में लड्डू कोई खाया है, चूरा इनको मिला है।

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