छत्तीसगढ़ के बिलासपुर हाईकोर्ट ने 20 साल पुराने बलवा और मारपीट के मामले में आरोपियों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने लंबे समय से मामला लंबित रहने और आरोपियों की वर्तमान स्थिति को देखते हुए जेल में बिताई गई अवधि को ही पर्याप्त सजा मान लिया।
यह मामला जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम धाराशिव का है। वर्ष 2005 में एक श्राद्ध कार्यक्रम के दौरान “चापलूस” कहने को लेकर विवाद शुरू हुआ था। बाद में यह विवाद हिंसक झड़प में बदल गया, जिसमें लाठी, तलवार, कुल्हाड़ी और लोहे की रॉड से हमला किया गया था। घटना में कई लोग घायल हुए थे, जिनमें कुछ को गंभीर चोटें और फ्रैक्चर भी आए थे।
मामले में पुलिस ने जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया था। वर्ष 2008 में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जांजगीर ने आरोपियों को दोषी ठहराते हुए अलग-अलग धाराओं में सजा और जुर्माना सुनाया था।
अब हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान माना कि घटना को करीब 20 साल बीत चुके हैं और अपील भी लंबे समय से लंबित थी। अदालत ने यह भी देखा कि आरोपी पहले ही एक महीने से ज्यादा समय जेल में बिता चुके हैं। ऐसे में कोर्ट ने जेल में काटी गई अवधि को पर्याप्त सजा मानते हुए राहत प्रदान की और जुर्माने की राशि जमा करने के निर्देश दिए।
INDIA WRITERS Voices of India, Words That Matter