पटना। बिहार के नवनियुक्त राज्यपाल और भारतीय सेना के पूर्व दिग्गज अधिकारी, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन गुरुवार को राजधानी पटना पहुंचे । उनका भव्य शपथ ग्रहण समारोह 14 मार्च को राजभवन (लोक भवन) में आयोजित होगा, जहां पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे।
रणनीतिक कौशल का मिलेगा लाभ
सैयद अता हसनैन भारतीय सेना में अपनी 40 वर्षों की शानदार सेवा और रणनीतिक सूझबूझ के लिए विख्यात हैं। उन्होंने सेना में कई चुनौतीपूर्ण मोर्चों पर नेतृत्व किया है। उनकी नियुक्ति को बिहार के प्रशासनिक ढांचे और सुरक्षा परिप्रेक्ष्य में बेहद अहम माना जा रहा है। सैन्य विशेषज्ञता के कारण उम्मीद है कि उनके अनुभव का लाभ राज्य के विकास और कानून-व्यवस्था में दिखेगा।
श्रीनगर में ‘चिनार कोर’ का किया सफल नेतृत्व
अपने सैन्य करियर के दौरान हसनैन ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2012 से 2014 के बीच वे श्रीनगर स्थित 15 कोर (चिनार कोर) के कमांडर रहे। उन्होंने वहां केवल सैन्य शक्ति का ही इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि “हार्ट्स एंड माइंड्स” नीति के तहत स्थानीय जनता और युवाओं का भरोसा जीतने पर विशेष बल दिया।
शिक्षा और आपदा प्रबंधन में सक्रिय भूमिका
सेना से सेवानिवृत्ति के बाद भी वे देश सेवा में जुटे रहे। वे राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के सदस्य रहे और कश्मीर यूनिवर्सिटी के चांसलर के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं। शिक्षा, खेल और रोजगार के जरिए युवाओं को मुख्यधारा में लाने का उनका प्रयास हमेशा सराहनीय रहा है।
बिहार में मुस्लिम राज्यपालों का सिलसिला
बिहार के राजनीतिक इतिहास में यह एक दिलचस्प मोड़ है। लंबे समय (26 साल) के अंतराल के बाद, आरिफ मोहम्मद खान के रूप में बिहार को मुस्लिम राज्यपाल मिला था। अब सैयद अता हसनैन की नियुक्ति के साथ यह सिलसिला जारी है, जो राज्य की समावेशी छवि को और मजबूत करता है।
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