बिजली के डकैतों ने सरकार को लगाया चूना

बिजली के झटके से लड़खड़ाई पूरी सरकार, अब हाफ राहत की तैयारी!

इंडिया राइटर्स द्वारा शराब दुकान ठेके के खबर के असर के बाद घरेलू बिजली के बिल पर राहत की बड़ी खबर है। सिर्फ चार महीने में स्टील लॉबी को सस्ते और आम उपभोक्ता को महंगे दर में बिजली देने की खबर से सरकार को इतना करेंट लगा है कि अब बढ़े हुएं रेट को संशोधित करने की तैयारी हो चुकी है।

भूपेश बघेल की सरकार के सबसे सराहनीय कार्य में छत्तीसगढ़ के बिजली उपभोक्ता को बिजली का बिल हाफ योजना थी। पहले सौ यूनिट मुफ्त में और फिर आगे के तीन सौ यूनिट पर आधा भुगतान करना होता था। इसके बाद अधिक खपत होने पर निर्धारित दर पर बिजली का बिल पटाना पड़ता था। कांग्रेस सरकार के जाने के बाद भाजपा की सरकार आई। जनवरी 2024से लेकर जुलाई 2025याने उन्नीस महीने तक बिजली का बिल हाफ योजना चलती रही।

अगस्त 2025 में अचानक ही
बिजली बिल भुगतान की नई योजना आ गई। इस योजना में छत्तीसगढ़ के स्टील लॉबी को जमकर राहत दिया गया और आम उपभोक्ता जिसमें ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में रहने वाले गरीब उपभोक्ता है उनसे लूटमारी का फरमान आ गया। इस घटना के साथ एक संयोग ये था. स्टील लॉबी को छूट दिए जाने के नाम पर करोड़ो रूपये की अंडरडील की अफवाह भी ऊर्जा मंत्रालय सहित साय साय के करीबी रवि मिश्रा के नाम को लेकर उड़ी थी।

स्टील उद्योग को छूट और गरीब उपभोक्ताओं से लूट को लेकर व्यापक प्रतिक्रिया हुई थी। ये भी बात उठी थी कि भाजपा को आदिवासी क्षेत्र से विधान सभा में सरकार बनाने का अवसर मिला है।आदिवासी क्षेत्रों में कुटीर उद्योग है जिनमें आटा चक्की, हॉलर, छोटे छोटे अन्य खाद्य प्रसंस्करण के कार्य है। आदिवासी न पंखा चलाते न कूलर नहीं उनके यहां फ्रीज आदि होते है।ऐसे लोगों को ऊर्जा विभाग के अधिकारियों सहित कांग्रेस शासनकाल के सूर्यकांत तिवारी के समान भाजपा के रवि मिश्रा ने भाजपा की छबि को बदसूरत कर दिया।

तीन महीने में भाजपा के इंटलीजेंस ने सरकार को सचेत कर दिया कि विष्णु देव साय की सरकार जन समर्थन खो चुकी है।आज अगर चुनाव हो जाए तो सरकार पलट जाएगी। बताया जाता है कि प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के रायपुर आगमन पर संगठन के पदाधिकारियों के अलावा अनेक सांसद ,विधायकों ने भी सरकार में मनमानी करने वाले नौकरशाह से बने नेता और उनके इशारे पर नीति को आय के नाम बदलने वालो की शिकायत की गई थी। प्रधान मंत्री के हस्तक्षेप के बाद संशोधित बिजली हाफ बिल रेट की तैयारी हाफ मन से शुरू होने की खबर है.

कांग्रेस शासनकाल में 400यूनिट तक हाफ बिजली बिल आता था। अब 200यूनिट तक हाफ बिल आयेगा ऐसा मसौदा है। हाफ मन से हाफ यूनिट की कमी मान सकते है. दूसरी तरफ सबसे बड़ा प्रश्न ये है कि ऊर्जा विभाग ने अगस्त 25 में स्टील लॉबी को जो छूट प्रदान की उसका खुलासा क्यों नहीं किया गया? 15पैसे से 30 पैसे यूनिट की छूट स्टील लॉबी को 54करोड़ रुपए के बड़े अंडरडील किए जाने की चर्चा सत्ता के गलियारे में तैर रही है। इसको दबाने और दफनाने के लिए 200यूनिट तक हाफ बिल का शगूफा छोड़ा जा रहा है।

विद्युत नियामक आयोग बताता है कि बिजली चोरी और लाइंस खर्च के चलते साढ़े चार हजार करोड़ का नुकसान है। जिसकी भरपाई करने के लिए गरीबों को त्रस्त करने की योजना मिश्रा की थी। दम होता तो वर्तमान में जो छूट जनता को देने की बनाई जा रही है उसी में स्टील उद्योग के प्रति यूनिट राशि को पुराना करने की होना चाहिए थी। ऐसा नहीं होगा, ये पूरे मन की बात है।

खैर पूरा 400यूनिट का आधा 200 यूनिट हाफ करना पूरा थूक कर आधे चाटने के समान है। सरकार की किरकिरी करने वाले मुख्यमंत्री के निजी स्टाफ सहित नौकरशाहों को बदलना भी हाफ हाफ होना चाहिए.

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