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‘साल में 14 लाख कमाने वाली महिला मेंटिनेंस की हकदार नहीं’, हाई कोर्ट ने खारिज की पत्नी की याचिका

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने भोपाल की रहने वाली एक महिला की ओर से पति से अंतरिम भरण-पोषण (मेंटिनेंस) की याचिका को खारिज कर दिया है. अदालत ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए कहा है कि आर्थिक रूप से सक्षम व्यक्ति को भरण-पोषण नहीं दिया जा सकता. कोर्ट ने कहा कि यह याचिका पति से अनुचित लाभ लेने की कोशिश है.

क्या था मामला?
इस दंपत्ति का विवाह 4 नवंबर 2022 को हुआ था. पति ने फैमली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर की थी, जबकि पत्नी ने अंतरिम भरण-पोषण की मांग की थी. दोनों पति-पत्नी साल 2023 से अलग रह रहे थे. दोनों की कोई संतान भी नहीं है. फैमिली कोर्ट ने 18 फरवरी 2026 को आदेश दिया था कि तलाक प्रकरण लंबित रहने के दौरान महिला को कोई मेंटिनेंस नहीं दिया जाएगा. इसी आदेश को महिला ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी

अदालत में पत्नी ने खुद स्वीकार किया
पत्नी ने अदालत में खुद स्वीकार किया था कि उसकी सालाना आय ₹20 लाख थी. बाद में उसने कहा कि उसकी आय घटकर ₹14.81 लाख रह गई है. जबकि पत्नी ने आरोप लगाया कि पति की सालाना आय ₹30 लाख है. पत्नी का कहना है कि उसकी आय घटकर 14 लाख रुपये रह गई है इसलिए उसे आर्थिक मदद मिलनी चाहिए.

पत्नी वार्षिक आय करीब 14.81 लाख रुपए
हाई कोर्ट ने महिला की आय से जुड़े दस्तावेजों की जांच की. रिकॉर्ड के अनुसार महिला की मासिक आय लगभग 1.25 लाख रुपए है, जिससे उनकी वार्षिक आय करीब 14.81 लाख रुपए बनती है. इसके बाद जस्टिस विवेक जैन की पीठ ने कहा कि यह आय स्वयं का भरण-पोषण करने के लिए पर्याप्त है. ऐसे में महिला को आर्थिक रूप से आश्रित नहीं माना जा सकता.

अदालत ने कहा कि भरण-पोषण का उद्देश्य आर्थिक रूप से जरूरतमंद या आश्रित जीवनसाथी की सहायता करना है, न कि समान आर्थिक स्थिति वाले व्यक्ति को अतिरिक्त वित्तीय लाभ देना. हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को सही मानते हुए पत्नी की याचिका खारिज कर दी.

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