हिमाचल प्रदेश में इन दिनों पर्यटन का पूरा परिदृश्य बहुत तेजी से बदल रहा है। दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े महानगरों की भीड़भाड़ और प्रदूषण से दूर, शांत वातावरण में काम करने की चाह रखने वाले आईटी प्रोफेशनल्स और निजी क्षेत्र के कर्मचारी बड़े पैमाने पर पहाड़ों का रुख कर रहे हैं।
शिमला, मनाली, कसौली, चायल और धर्मशाला जैसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों पर अब लोग सिर्फ सप्ताहांत बिताने नहीं आ रहे, बल्कि ‘वर्क फ्रॉम होम’ की सुविधा का फायदा उठाते हुए कई दिनों तक ठहर रहे हैं। इस ‘वर्क फ्रॉम माउंटेन’ संस्कृति ने हिमाचल की वादियों को एक बड़े कॉर्पोरेट हब में बदल दिया है, जहां काम और सुकून का एक बेहतरीन तालमेल देखने को मिल रहा है।
हाई-स्पीड वाईफाई और पावर बैकअप बने होटलों की नई पहचान
इस बदलते दौर में पर्यटकों की प्राथमिकताएं भी पूरी तरह बदल चुकी हैं। अब सैलानी केवल कमरे की खूबसूरती या बालकनी से दिखने वाले पहाड़ों के नजारों को देखकर होटल बुक नहीं कर रहे हैं। उनकी पहली और सबसे जरूरी शर्त हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी, बिना किसी रुकावट के मिलने वाला बिजली बैकअप और कमरे के अंदर काम करने के लिए एक आरामदायक टेबल-कुर्सी है।
इस नई मांग को देखते हुए हिमाचल के होटल और होमस्टे संचालकों ने भी अपने बुनियादी ढांचे को पूरी तरह अपग्रेड कर लिया है। लंबे समय तक रुकने वाले इन कामकाजी मेहमानों के लिए विशेष पैकेज पेश किए जा रहे हैं और कमरों के भीतर ही अलग से समर्पित वर्कप्लेस तैयार किए जा रहे हैं ताकि ऑनलाइन बैठकों और ऑफिस के कामों में कोई बाधा न आए।
ग्रामीण होमस्टे और टैक्सी ऑपरेटरों की बदल गई किस्मत
महामारी के बाद कार्य संस्कृति में आए इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा हिमाचल की स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिल रहा है। अब पर्यटकों की आमद केवल शनिवार और रविवार तक सीमित नहीं है, बल्कि कामकाजी लोग गुरुवार की रात या शुक्रवार की सुबह ही पहाड़ों पर पहुंच जाते हैं। वे शुक्रवार को वहीं से ऑनलाइन लॉगिन करके अपना काम पूरा करते हैं और सोमवार तक वहीं रुकते हैं।
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