4 इंटरव्यू और 3 हफ्तों की मेहनत गई बेकार! कैंड‍िडेट ने 20 लाख का ऑफर ठुकराया, कंपनी ने क्यों मानी अपनी गलती?

Salary Transparency: आज के समय में हर कोई नौकरी पैसों के लिए ही करता है. जिसको जहां से अच्‍छा ऑफर मिलता है वह अपनी पुरानी कंपनी को छोड़कर नए संस्थान में जाने से नहीं चुका है. इन सब के बीच सैलरी को लेकर स्पष्ट कितनी जरूरी है, इसका एक दिलचस्प उदाहरण हाल ही में सामने आया है.

एक स्टार्टअप कंपनी के फाउंडर ने खुद स्वीकार किया कि भर्ती प्रक्रिया में हुई एक छोटी सी गलती के कारण कंपनी और उम्मीदवार दोनों का समय बर्बाद हो गया है. मतलब यह कि एक गलती कंपनी को भी भारी पड़ गई.

वेतन को लेकर सामने आया मतभेद
मामला तब चर्चा में आया जब कंपनी ने एक सीन‍ियर पोस्‍ट के लिए भर्ती शुरू की. कैंड‍िडेट ने चार अलग-अलग इंटरव्यू राउंड पूरे किए और पूरी सिलेक्शन प्रोसेस लगभग तीन हफ्ते तक चली. इंटरव्यू के दौरान दोनों पक्ष एक-दूसरे से प्रभावित भी थे. ऐसा लग रहा था कि नौकरी तय हो जाएगी. लेकिन आखिरी चरण में वेतन को लेकर ऐसा मतभेद सामने आया कि पूरी प्रक्रिया ही रुक गई.

दरअसल, कंपनी ने कैंड‍िडेट को सालाना 20 लाख रुपये का पैकेज ऑफर किया, जबकि उम्मीदवार को उम्मीद थी कि इस पद के लिए उसे करीब 28 लाख रुपये सालाना वेतन मिलेगा. दोनों के बीच यह अंतर शुरुआत में कभी चर्चा का विषय ही नहीं बना. जब ऑफर लेटर सामने आया, तब जाकर पता चला कि दोनों की अपेक्षाएं एक-दूसरे से काफी अलग हैं. नतीजतन उम्मीदवार ने नौकरी का ऑफर लेटर ठुकरा दिया.

फाउंडर ने इसको लेकर क्या कहा?
फाउंडर ने बाद में सोशल मीडिया पर अपनी रियेक्‍शन देते हुए माना कि गलती कंपनी की ओर से हुई थी. नौकरी के विज्ञापन में सैलरी लिमिट का उल्लेख नहीं किया गया था. मतलब यह कि पहले नहीं बताया गया था कंपनी कितने पैसे कैंड‍िडेट को दे सकती हे. इसी वजह से कैंड‍िडेट ने अपने अनुभव और बाजार की स्थिति के आधार पर अधिक वेतन की उम्मीद बना ली, जबकि कंपनी का बजट उससे काफी कम था.

फाउंडर ने यह भी कहा कि एक ही पद का वेतन अलग-अलग कंपनियों में काफी भिन्न हो सकता है. ऐसे में केवल पद का नाम देखकर उम्मीदवार किसी वेतन स्तर की कल्पना कर लेते हैं, जबकि वास्तविकता कंपनी के बजट और नीतियों पर निर्भर करती है.

सोशल मीडिया पर जमकर हो रही चर्चा
यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और लोगों ने भर्ती प्रक्रिया में वेतन संबंधी पारदर्शिता की आवश्यकता पर जोर दिया है. कई पेशेवरों का कहना था कि अगर शुरुआत में ही वेतन सीमा बता दी जाए तो उम्मीदवार और कंपनी दोनों का समय बच सकता है. वहीं कुछ लोगों ने इसे आधुनिक भर्ती प्रक्रियाओं के लिए एक महत्वपूर्ण सबक बताया है.

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