पिछले 36 घंटों से गायब 4 बलूच छात्रों की हत्या ने एक बार फिर बलूचिस्तान की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं. परिवारों का आरोप है कि ये सभी छात्र पहले जबरन गायब किए गए और बाद में सुरक्षा बलों और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी (ISI) के सशस्त्र गिरोहों ने इन्हें मार दिया. बलूचिस्तान से पिछले 3 सालों में 1713 बलूच युवा जबरन गायब हो चुके हैं.ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ़ बलूचिस्तान (HRCB) डेटा के मुताबिक पिछले साल 390 से ज़्यादा युवाओं के जबरन ग़ायब होने के मामले सामने आए और 80 से ज्यादा लोगों की लाशें मिलीं.
स्थानीय मानवाधिकार संगठन Baloch Yakjehti Committee (BYC) का कहना है कि ये घटनाएं अलग-थलग नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित पैटर्न का हिस्सा हैं. 22 वर्षीय ग्रेजुएशन छात्र जुनैद अहमद, जो सुराब का निवासी था, उसे पहले 23 जनवरी 2026 को जबरन उठाया गया और फिर क्वेटा के एक अस्पताल से ईगल फोर्स और काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD) के कर्मियों ने जुनैद को बिना वारंट हिरासत में लिया. कल (15 फरवरी) को कई हफ्तों बाद उसका शव मिला, जिस पर गोली के निशान थे.
इसी तरह पंजगुर के मैट्रिक छात्र जंगीयान बलोच को 26 मई 2025 को उठाया गया था. परिवार का आरोप है कि इसमें फ्रंटियर कॉर्प्स (FC) और एक ISI का डेथ स्क्वाड शामिल था. इसके बाद 15 फरवरी 2026 को उसका शव शापतान इलाके में मिला.
17 साल के एक और छात्र मुहनास बलोच को तुंप में स्थित उसके घर से स्थानीय सुरक्षा एजेंसी के अधिकारियों ने 14 फरवरी को उठाया और थोड़ी दूर आगे ले जाकर गोली मारकर हत्या कर दी. एक और छात्र नवाब अब्दुल्ला, जिसे मई 2025 को फ्रंटियर कॉर्प्स ने घर से उठाया गया था. 8 महीने बाद 14 फरवरी को उसका शव घर के बाहर फेंक दिया गया.
वैसे बलूचिस्तान में युवाओं को जबरन ग़ायब करने के मामले साल 2000 से बलूचिस्तान में सशस्त्र विद्रोह शुरू होने के बाद से ही शुरू हो गए थे, जहां पाकिस्तानी सेना और ISI आज़ादी के आंदोलनों में शामिल युवाओं को बिना वारंट अवैध तरीक़े से हिरासत में लेने के बाद या तो मार देती थी या फिर बलोच विद्रोही गुट के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए बनाए गए गुटों में शामिल करवा देती थी, लेकिन साल 2022 से इन मामलो में भारी इज़ाफ़ा हुआ है.
INDIA WRITERS Voices of India, Words That Matter