समोसे से लेकर गिग वर्कर्स की उठाई आवाज…राघव चड्ढा के वे 7 मुद्दे जिन्हें AAP ने बताया PR

आम आदमी पार्टी के राज्‍यसभा सांसद राघव चड्ढा को पार्टी ने राज्‍यसभा में ड‍िप्‍टी लीडर पद से हटा दिया है. AAP के इस फैसले के बाद पार्टी और चड्ढा के बीच खींचतान बढ़ गई है. आप के कई नेताओं ने आरोप लगाया कि राघव अपने पीआर से जुड़े मामले ही राज्‍यसभा में उठाया करते थे. जबकि राघव ने कहा कि उन्हें “चुप करा दिया गया” था, क्योंकि वह लगातार ऐसे मुद्दे उठाते थे जो सीधे लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डालते हैं.

राघव चड्ढा, जिन्हें कभी आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल का बेहद करीबी माना जाता था. उनकी पहचान दिल्ली और पंजाब मामलों में बेहद खास थी. ज्यादातर फैसलों में उनकी राय ली जाती थी. हालांकि अब खुद अंदरूनी खींचतान के बीच फंसे हुए हैं. ऐसे में जानते हैं राघव वे कौन से मुद्दे उठाए जिसकी वजह से वजह चर्चा में रहे हैं.

राघव ने राज्‍यसभा में इन मुद्दों पर दिया जोर

पैटरनिटी लीव और शेयर्ड केयरगिविंग
राघव चड्ढा ने हाल ही में पार्लियामेंट में जिन मुद्दों को उठाया, उनमें से एक पैटरनिटी लीव को लीगल मान्यता देने की मांग भी शामिल थी. उन्होंने कहा, “मैंने पार्लियामेंट में मांग की थी कि भारत में पैटरनिटी लीव एक लीगल अधिकार होना चाहिए, उन्‍होंने तर्क दिया कि केयरगिविंग की ज़िम्मेदारी सिर्फ़ महिलाओं पर नहीं आनी चाहिए. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि “केयरगिविंग एक शेयर्ड ज़िम्मेदारी है.

मेट्रो शहरों में ट्रैफिक का संकट
चड्ढा ने बड़े शहरों में बिगड़ते ट्रैफिक जाम पर भी चिंता जताई थी. उन्होंने बेंगलुरु, मुंबई, दिल्ली और चेन्नई जैसे शहरों की ओर इशारा करते हुए कहा, “ट्रैफिक ने हमारे मेट्रो शहरों को बड़े पार्किंग लॉट में बदल दिया है, जिनमें लोग फंसे रहते हैं.” उन्होंने कहा कि देश के इन हिस्सों में आने-जाने वाले लोग “साल में 100 से 168 घंटे ट्रैफिक में फंसे रहते हैं.”

28-दिन का मंथली रिचार्ज और ‘इस्तेमाल करो या खो दो’ डेटा
चड्ढा के दखल का एक बड़ा हिस्सा टेलीकॉम प्रैक्टिस, खासकर प्रीपेड यूजर्स पर फोकस था.उन्होंने कहा, “टेलीकॉम कंपनियां ‘डेली डेटा लिमिट’ वाले रिचार्ज प्लान ऑफर करती हैं. कोई भी इस्तेमाल न किया गया डेटा पूरी पेमेंट के बावजूद आधी रात को एक्सपायर हो जाता है.”

“आपसे 2GB का बिल लिया जाता है. बाकी 0.5GB दिन खत्म होते ही गायब हो जाता है. कोई रिफंड भी नहीं द‍िया जाता है. यह कोई एक्सीडेंट नहीं है. यह पॉलिसी है.” उन्होंने सवाल किया कि पेड डाटा क्यों जब्त किया जाना चाहिए और मांग की कि इस्तेमाल न किए गए डेटा को आगे बढ़ाया जाए.

AAP नेता ने 28 दिन का मंथली रिचार्ज स्कैम भी बताया है. उन्होंने कहा, “टेलीकॉम कंपनियां अपने प्लान को ‘मंथली’ कहती हैं, लेकिन वे सिर्फ़ 28 दिन चलते हैं,” उन्होंने कहा कि यूज़र्स असल में साल में 13 रिचार्ज के लिए पैसे देते हैं. उन्होंने कंपनियों से 30-31 दिन के साइकिल वाले प्लान बनाने की अपील की.

पीरियड्स की हेल्थ और इज्जत
सोशल मुद्दों पर, चड्ढा ने पीरियड्स हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर में कमियों को हाईलाइट किया.उन्होंने कहा, “जब कोई लड़की स्कूल इसलिए मिस करती है क्योंकि पैड नहीं है, पानी नहीं है, डस्टबिन नहीं है और प्राइवेसी नहीं है, तो यह उसकी पर्सनल प्रॉब्लम नहीं है. यह हमारे सिस्टम की नाकामी है.”

एयरपोर्ट का खाना और ‘उड़ान यात्री कैफ़े’
शुक्रवार को AAP नेताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ चुप्पी पर चड्ढा से सवाल करने के लिए “समोसा” शब्द का इस्तेमाल किया. यह एक भारतीय स्नैक है. AAP नेता राघव चड्ढा द्वारा एयरपोर्ट पर महंगे खाने को लेकर उठाई गई चिंताओं का ज़िक्र कर रहे थे.उन्होंने कहा, “हवाई यात्री लंबे समय से एयरपोर्ट पर खाने की ज्यादा कीमत की शिकायत करते रहे हैं,” और चल रहे बजट सेशन में सरकार की उड़ान यात्री कैफ़े पहल का स्वागत किया.

उन्‍होंने कहा कि एयरपोर्ट पर सस्ता खाना लग्जरी नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा, “यह यात्रियों के लिए एक बेसिक सुविधा है. कुछ दिनों बाद, मिनिस्ट्री ऑफ़ सिविल एविएशन ने उड़ान यात्री कैफ़े को बढ़ाने की घोषणा की.

राइट टू रिकॉल और पॉलिटिकल अकाउंटेबिलिटी
एक बड़े पॉलिटिकल सुधार की बात करते हुए, चड्ढा ने “राइट टू रिकॉल” की वकालत की है. उन्होंने कहा, अगर वोटर नेता रख सकते हैं, तो उन्हें नेता को निकालने का भी हक होना चाहिए. उन्होंने बताया कि कई डेमोक्रेसी में पहले से ही रिकॉल मैकेनिज्म हैं, साथ ही यह भी कहा कि गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए सुरक्षा उपाय जरूरी होंगे.

गिग वर्कर्स और जमीनी हकीकत
चड्ढा ने कई मौकों पर गिग इकॉनमी वर्कर के बारे में भी बात की है. उन्‍होंने “सही वेतन, इंसानी घंटे और बुनियादी सुरक्षा उपायों” पर हमेशा ज़ोर दिया. उन्होंने एक डिलीवरी वर्कर के साथ एक दिन भी बिताया ताकि उनकी चुनौतियों को समझ सकें, बेहतर वेतन और फायदों की मांगों का समर्थन किया.

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