Ambikapur: बिरला ओपन माइंड और मोनफोर्ट स्कूल में लूट का धंधा हुआ बेनकाब, प्रशासन ने लगाया बड़ा जुर्माना

Ambikapur: सरगुजा जिले में विस्तार न्यूज़ की खबर का लगातार बड़ा असर हो रहा है. शिक्षा विभाग ने जिला प्रशासन की टीम के साथ मिलकर बिरला ओपन माइंड स्कूल और मोन्ट फ़ोर्ट स्कूल में अचानक पहुंचकर स्कूलों में चल रहे अवैध व्यापार का खुलासा किया. इस खुलासे के लिए जिला शिक्षा अधिकारी और एसडीएम स्कूलों में उस वक्त पहुंचे, जब वहां पर अभिभावक और शिक्षकों की बैठक हो रही थी. इसी दौरान जब अधिकारियों ने अभिभावकों से बातचीत करना शुरू किया.

दोनों स्कूलों को नोटिस जारी
तब पता चला कि स्कूलों के द्वारा हर साल एडमिशन शुल्क और निर्धारित दुकानों में ही निजी प्रकाशकों की किताब खरीदने का दबाव बनाया जाता है. एनसीईआरटी की किताब सिर्फ और सिर्फ नाम मात्र के लिए ही पढ़ाई जाती है. प्रशासन ने दोनों स्कूलों को नोटिस जारी किया है. इसके अलावा कहा गया है कि अगर उनके द्वारा दो दिन में संतोष जनक जवाब नहीं दिया जाता है तो दोनों स्कूलों के द्वारा वसूल किए गए अवैध रुपए का 50% हिस्सा जुर्माना के रूप में लगाया जाएगा.

अलग-अलग तरीके से अवैध उगाही
अंबिकापुर में दर्जन भर से अधिक ऐसे बड़े निजी स्कूल हैं जो हर साल करोड रुपए की अवैध उगाही अलग-अलग तरीके से अभिभावकों से कर रहे हैं. जिला शिक्षा अधिकारी और एसडीएम जब मोंट फ़ोर्ट स्कूल में पहुंचे तब बड़ा खुलासा हुआ.अभिभावको ने अफसरों को बताया कि कक्षा 1 ली से 8वीं तक की समस्त किताबें एवं कापी आशा बुक डिपो व राणा ब्रदर्स से बंडल बनाकर बेचा जा रहा है. जांच में विद्यालय प्रबंधन द्वारा कक्षाओं के समस्त अभिभावकों को दोनो दुकानदारों से सामग्री क्रय किये जाने मोबाईल के माध्यम से मैसेज दिया जाना प्रमाणित पाया गया.

अभिभावक द्वारा जानकारी दी गई कि…
एक अभिभावक द्वारा जानकारी दी गई कि विद्यालय से किताबों की सूची दी गई एवं कहां से किताब कॉपी लिया जाना है, यह भी निर्देश दिया गया है. सभी किताबें एवं कापियां बंडलिंग बनाकर क्रय किये जाने हेतु विवश किया गया. कई अभिभावकों ने यह भी जानकारी दी कि एक या दो किताबे अथवा बिना कापियों के किताबें मांगने पर नहीं दिया गया.

जांच में हुआ खुलासा
जांच में खुलासा हुआ कि सीबीएसई एफिलिएशन Bye-Laws 2018 के क्लॉज 2.4.7 का उल्लंघन करते हुए कक्षा नर्सरी से 8वीं तक केवल प्राइवेट पब्लिशर की महंगी महंगी किताबें पढ़ाया जाना प्रमाणित पाया गया. कक्षा 9वीं से 12वीं में भी कुछ प्राइवेट पब्लिशर की महंगी महंगी किताबें पढ़ाया जाना प्रमाणित पाया गया.

शुल्क बढ़ाना था 5% तक बढ़ा दिए 14% से अधिक
जांच में यह भी उजागर हुआ कि प्रत्येक वर्ष एडमिशन फीस लिया जाना प्रमाणित पाया गया. जबकि शिक्षा संहिता शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत प्रवेश शुल्क लिया जाना बैन है. शिक्षा सत्र 2025-26 की तुलना में शिक्षा सत्र 2026-27 में सभी मदों में न्यूनतम 5 प्रतिशत् ही बढ़ाया जा सकता है लेकिन अधिकतम 14 प्रतिशत तक फीस वृद्धि किया जाना पाया गया.

अभिभावकों और बच्चों से लूट का धंधा
इसी तरह बिरला ओपन माइंड स्कूल में भी गड़बड़ी मिली है.
कक्षा 1 ली से 8वीं तक की समस्त किताबें एवं कॉपी मेसर्स किताब घर से बंडल के रूप में क्रय कराया जाना प्रमाणित पाया गया. बिरला फाउंडेशन के द्वारा अनुशंसित किताबें ही पढ़ाया जा रहा है. कक्षा 1 ली से 8वीं तक NCERT की कुछ किताबें के अलावा लगभग सभी किताबें निजी प्रकाशकों की हैं.

प्रत्यक्ष रूप से दबाव बनाया गया
सभी किताबें एवं कापियों बंडलिंग बनाकर क्रय किये जाने हेतु विवश करना परिलक्षित हुआ. फील्ड ट्रिप, वर्कशॉप, सेमिनार के नाम से अवैध शुल्क लिया जाना भी प्रमाणित पाया गया. प्रबंधन द्वारा अभिभावकों को एक निश्चित दुकान से किताब कापियों का सेट्स क्रय करने हेतु प्रत्यक्ष रूप से दबाव बनाया गया. पुस्तकों की सूची विद्यालय के वेबसाईट पर अपलोड किया जाना नहीं पाया गया. यूनिफार्म एक निश्चित दुकान से क्रय किये जाने की जानकारी छात्र-छात्राओं द्वारा दी गई.

एडमिशन शुल्क के नाम पर भी नियम कानून ताक पर रखकर वसूली
स्कूल द्वारा प्रदत्त शुल्क सूची के अनुसार रजिस्ट्रेशन शुल्क, एडमिशन शुल्क तथा सुरक्षा निधि शुल्क लिया जाना पाया गया. जबकि शिक्षा संहिता/शिक्षा का अधिका अधिनियम 2009 के तहत रजिस्ट्रेशन शुल्क, एडमिशन शुल्क तथा सुरक्षा निधि शुल्क लिया जाना बैन है. स्कूलों को जारी नोटिस में कहा गया है कि इस सत्र में कुल दर्ज 864 छात्र-छात्राओं से वसूल किये गये कुल फीस राशि (समस्त मदों सहित) का 50 प्रतिशत् जुर्माना लगाया जाना प्रस्तावित है.

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