दिल्ली। एयरटेल ने अपनी नई ‘प्रायोरिटी पोस्टपेड’ सेवा को लेकर उठे सवालों पर दूरसंचार विभाग की समिति के सामने अपना पक्ष रखा है। कंपनी ने साफ कहा कि 5जी नेटवर्क स्लाइसिंग तकनीक पर आधारित यह सेवा नेट न्यूट्रैलिटी नियमों का उल्लंघन नहीं करती और इससे प्रीपेड ग्राहकों की सेवा गुणवत्ता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन की ओर से मांगे गए स्पष्टीकरण के जवाब में एयरटेल ने कहा कि उसकी यह सेवा पूरी तरह “कंटेंट-न्यूट्रल” तरीके से लागू की गई है। कंपनी के मुताबिक इसमें किसी एप्लीकेशन को ब्लॉक करना, स्पीड कम करना, कंटेंट के आधार पर प्राथमिकता देना, जीरो-रेटिंग करना या किसी ऐप को विशेष लाभ देना शामिल नहीं है। एयरटेल ने दावा किया कि यह सेवा TRAI और DoT के मौजूदा नियमों के अनुरूप है।
कंपनी ने 19 मई को ‘प्रायोरिटी पोस्टपेड’ प्लान लॉन्च किए थे। एयरटेल का कहना है कि इस प्लान के जरिए पोस्टपेड ग्राहकों को भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी बेहतर और स्थिर इंटरनेट स्पीड मिलेगी। इसके लिए 5जी नेटवर्क स्लाइसिंग तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जिसमें नेटवर्क का एक हिस्सा विशेष सेवा के लिए आरक्षित किया जाता है।
पीक आवर्स में 5जी नेटवर्क क्षमता का उपयोग लगभग 38 प्रतिशत
एयरटेल ने समिति को बताया कि फिलहाल पीक आवर्स में कुल 5जी नेटवर्क क्षमता का उपयोग लगभग 38 प्रतिशत है। इसमें पोस्टपेड ट्रैफिक की हिस्सेदारी करीब 4 प्रतिशत है, जो प्रायोरिटी पोस्टपेड सेवा लागू होने के बाद लगभग 6 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। कंपनी का दावा है कि इसके बावजूद प्रीपेड और अन्य सामान्य यूजर्स के लिए कुल क्षमता का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा उपलब्ध रहेगा।
कंपनी ने यह भी कहा कि यदि भारत में 5जी की उन्नत सुविधाओं का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी गई, तो भविष्य में 6जी तकनीक के विकास और संभावनाओं को नुकसान हो सकता है। एयरटेल का कहना है कि नई तकनीकों को अपनाना देश के डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और दूरसंचार क्षेत्र के विकास के लिए जरूरी है।
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