MP News: एक ओर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार ईंधन बचाने, सरकारी खर्चों में कटौती और संसाधनों के मितव्ययी उपयोग का संदेश दे रहे हैं. केंद्र और राज्य सरकार के कई मंत्री सार्वजनिक रूप से ई-रिक्शा की सवारी कर जनता को सादगी का संदेश दे रहे हैं. वहीं पड़ोसी सीधी जिले के कलेक्टर साइकिल से कार्यालय पहुंचकर ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा का उदाहरण पेश कर चुके हैं, लेकिन मऊगंज जिले में प्रशासनिक कार्यशैली की जो तस्वीर सामने आई है, उसने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
कुछ वाहन खाली नजर आए
हाल ही में सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और ब्लैक स्पॉट चिन्हित करने के उद्देश्य से किए गए निरीक्षण के दौरान मऊगंज कलेक्टर का काफिला चर्चा का विषय बन गया. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार निरीक्षण के लिए एक-दो नहीं, बल्कि पूरे 8 सरकारी वाहनों का काफिला सड़क पर दौड़ता दिखाई दिया. बताया जा रहा है कि कई वाहनों में केवल एक-एक अधिकारी मौजूद थे, जबकि कुछ वाहन लगभग खाली नजर आए.
ईंधन बचाने की अपील और जमीनी हकीकत
देशभर में ऊर्जा संरक्षण को लेकर अभियान चलाए जा रहे हैं. सरकारी विभागों को भी संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग के निर्देश दिए जाते हैं. ऐसे समय में एक सामान्य प्रशासनिक निरीक्षण के लिए आठ वाहनों का उपयोग लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है.
स्थानीय नागरिक सवाल उठा रहे हैं कि यदि सभी अधिकारी एक साथ निरीक्षण के लिए जा रहे थे तो क्या कम वाहनों में यह कार्य नहीं किया जा सकता था? क्या सरकारी ईंधन और संसाधनों के बेहतर उपयोग की कोई व्यवस्था नहीं बनाई जा सकती थी?
सादगी का संदेश बनाम VVIP संस्कृति
जहां एक तरफ जनप्रतिनिधि और अधिकारी सादगी का संदेश देने के लिए वैकल्पिक साधनों का उपयोग कर रहे हैं, वहीं मऊगंज में निरीक्षण के दौरान दिखाई पड़ा यह काफिला प्रशासनिक कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है. लोगों का कहना है कि जब सरकार स्वयं ईंधन बचाने का संदेश दे रही है, तब प्रशासनिक अमले को भी उसी भावना के अनुरूप कार्य करना चाहिए.
रीवा से मऊगंज तक रोजाना दौड़ते हैं अधिकारी
जानकारी के अनुसार जिले के कई अधिकारी प्रतिदिन रीवा से मऊगंज आना-जाना करते हैं। ऐसे में पहले से ही सरकारी वाहनों और ईंधन पर पर्याप्त खर्च होता है। अब निरीक्षण के दौरान आठ गाड़ियों के उपयोग ने इस बहस को और तेज कर दिया है कि आखिर सरकारी संसाधनों के उपयोग को लेकर मापदंड क्या हैं?
मऊगंज में सामने आई यह तस्वीर अब प्रशासनिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच चर्चा का विषय बन गई है. लोगों के बीच यह चर्चा हैं कि आखिर एक निरीक्षण के लिए इतने बड़े काफिले की आवश्यकता क्यों पड़ी और क्या यह प्रशासनिक मजबूरी थी या फिर VVIP संस्कृति का एक और उदाहरण. फिलहाल सवाल बरकरार है जब देश ईंधन बचाने की बात कर रहा है, तब क्या सरकारी तंत्र स्वयं उस संदेश का पालन कर रहा .
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