केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा एक कार्यक्रम के दौरान आदिवासी समाज के संदर्भ में “वनवासी” शब्द के उपयोग को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस मुद्दे पर अब बिलासपुर में भी आदिवासी समाज ने खुलकर विरोध जताया है।
हम वनवासी नहीं, आदिवासी हैं’- समाज ने उठाई आवाज (Tribal Community Upset)
समाज के लोगों ने कहा कि आदिवासी और वनवासी शब्दों का अर्थ अलग-अलग है और आदिवासी समाज स्वयं को वनवासी नहीं मानता।प्रदर्शन कर रहे लोगों ने कहा कि आदिवासी इस देश के मूल निवासी हैं और उनकी पहचान, इतिहास तथा अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासियों को वनवासी कहकर उनकी मूल पहचान को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।
बिलासपुर में आदिवासी संगठनों की दो टूक- पहचान से नहीं होगा समझौता
प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय मंत्री अमित शाह से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है।साथ ही उन्होंने कहा कि यदि इस मामले में माफी नहीं मांगी गई तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। फिलहाल इस बयान को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। अब देखना होगा कि यह विवाद यहीं थमता है या आगे और बड़ा रूप लेता है।
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