Saurabh Shikha Delhi Case 2020: देश में हर दिन दहेज और प्रताड़ना के हजारों मामले दर्ज किए जाते हैं. हालांकि इनमें से कुछ ही मामले सही होते हैं, बाकी के मामले गुस्से या बदला लेने के लिए ही दर्ज कराए जाते हैं. इस समय दिल्ली का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया. कोर्ट में अचानक जब पत्नी ने तलाक के पेपर फाड़कर पति को गले लगा लिया. यह देखकर सबका यही कहना था कि गुस्से के फैसले अंत में प्यार से ही सुलझाए जा सकते हैं. दिल्ली की रहने वाली शिखा सिंह और उनके पति सौरभ के बीच सालों से चल रहा विवाद उस समय नया मोड़ ले गया, जब शिखा के पिता गंभीर रूप से बीमार पड़ गए.
शिखा और सौरभ की शादी साल 2020 में हुई थी. शादी के कुछ समय बाद दोनों के बीच मतभेद बढ़ते गए और मामला अदालत तक पहुंच गया. रिश्तों में आई कड़वाहट इतनी गहरी हो गई कि दहेज उत्पीड़न सहित कई कानूनी विवाद शुरू हो गए. दोनों पक्ष लंबे समय से कोर्ट में एक-दूसरे के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे थे.
आर्थिक तंगी ने दिखाई हकीकत
लगातार चल रहे मुकदमों और आर्थिक परेशानियों का असर शिखा के बुजुर्ग पिता पर भी पड़ा. परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होती चली गई और उनके सामने इलाज तक कराने का संकट खड़ा हो गया. इसी बीच करीब दस दिन पहले उन्हें दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद उन्हें सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया. शिखा की माली हालत ठीक नहीं थी कि पिता का इलाज किसी अच्छे असपताल में कराया जा सके.
इसी दौरान सौरभ को अपने ससुर की गंभीर हालत की जानकारी मिली. रिश्तों में आई दरार और कानूनी लड़ाई को दरकिनार करते हुए उन्होंने तुरंत मदद का फैसला किया. सौरभ अस्पताल पहुंचे और बेहतर इलाज के लिए अपने ससुर को गुरुग्राम के एक बड़े निजी अस्पताल में भर्ती कराया. वहां उनका इलाज कराया गया और अब उनकी हालत पहले से काफी बेहतर बताई जा रही है.
मदद के बाद शिखा के सामने आई हकीकत
घटना का सबसे भावुक मोड़ उस दिन आया, जब दोनों पक्ष अदालत में सुनवाई के लिए पहुंचे. कोर्ट रूम में सौरभ को देखकर शिखा भावुक हो गईं. परिवार पर आए संकट के समय सौरभ द्वारा की गई मदद ने उनके मन में जमी नाराजगी को काफी हद तक खत्म कर दिया. बताया जाता है कि इसी दौरान उन्होंने तलाक से जुड़े दस्तावेज फाड़ दिए और पति को गले लगा लिया.
दामाद ने निभाया बेटे का फर्ज
इस पूरे घटनाक्रम की चर्चा सोशल मीडिया पर भी हो रही है. लोग इसे इस बात का उदाहरण बता रहे हैं कि कई बार रिश्तों में पैदा हुई दूरियां एक संवेदनशील कदम और मानवीय व्यवहार से खत्म हो सकती हैं. परिवार के करीबी लोगों का कहना है कि कठिन समय में सौरभ ने दामाद नहीं बल्कि बेटे का फर्ज निभाया.
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